Ram Mandir चंदा गबन मामले में Supreme Court का ट्रायल का आदेश; SIT बोली- ₹2.7 करोड़ की हेराफेरी

The CSR Journal Magazine
अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसे की चोरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। करीब पांच महीने पहले सामने आए इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT की चार्जशीट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। SIT ने अपनी जांच में पाया कि इस मामले में कुल ₹2.7 करोड़ की हेराफेरी हुई है।

SIT की जांच में क्या निकला?

SIT ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट में बताया कि मामले की जांच के दौरान पैसों के लेन-देन, बैंक ट्रांजैक्शन और फोरेंसिक सबूतों की बारीकी से पड़ताल की गई। इसमें नकद जमा, संपत्तियों की खरीद, निर्माण पर खर्च, गाड़ियों और गहनों के साथ-साथ कार्यक्रमों पर किए गए खर्च की भी जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट हो गया है कि 2.7 करोड़ रुपये की राशि में गड़बड़ी हुई है।

पीड़ितों को मिला दर्जा

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं को पीड़ित का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह याचिकाकर्ता मुकदमे की सुनवाई में सहयोग कर सकेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों और उनकी अचल संपत्तियों की भी पड़ताल की गई।

CCTV फुटेज की जांच

जांच के दौरान SIT ने आरोपी के खिलाफ कई सबूत जुटाए हैं, जिसमें CCTV फुटेज भी शामिल है। इन सबूतों के आधार पर 23 सितंबर को चार्जशीट दाखिल की गई थी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ानी चाहिए।

जनहित में याचिकाकर्ताओं की भूमिका

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ताओं को मुकदमे के दौरान सरकारी वकील और ट्रायल कोर्ट की मदद करने की अनुमति दी है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी मांग की कि 9 नवंबर 2019 के फैसले में मंदिर निर्माण के लिए आवंटित जमीन का स्वतंत्र और निष्पक्ष सर्वे कराया जाए।

विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी जांच

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि जमीन की सही स्थिति और सीमाओं का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी जांच कराई जाए। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर का मौजूदा परिसर उसी जमीन पर बनाया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आवंटित किया था।

राजस्व और कानूनी दस्तावेजों की मांग

याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि राजस्व और कानूनी विभाग के अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया जाए। इन दस्तावेजों के आधार पर राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के नक्शे और उसकी वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की सुनवाई में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। यह मामला केवल राम मंदिर के दान के पैसे की हेराफेरी का नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण जनहित का मामला भी है। अब देखना होगा कि ट्रायल कोर्ट इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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