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February 12, 2026

260 मौतों वाले एयर इंडिया विमान हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: AAIB को 3 हफ्ते में रिपोर्ट का आदेश, जांच की निष्पक्षता पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने एअर इंडिया के अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के मामले में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को तीन सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह दुर्घटना 12 जून 2025 को हुई थी, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह मामले की जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र से प्रक्रियात्मक प्रोटोकॉल पर संक्षिप्त रिपोर्ट दाखिल करने की मांग की गई।

‘AAIB की जांच अंतिम चरण में है’

इस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि AAIB की जांच अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महत्वपूर्ण जांच विदेशी एजेंसियों की मदद से पूरी की जानी बाकी है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। इस याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने विभिन्न पहलुओं का ध्यान रखा।

क्या AAIB जांच निष्पक्ष होगी?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच का विचार था कि AAIB की जांच रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए, लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने आश्वस्त किया कि यह जानकारी जजों से साझा की जाएगी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि AAIB की भूमिका केवल घटना के कारणों की जांच तक ही सीमित है, और इसका उद्देश्य किसी प्रकार की मंशा तय नहीं करना है।

NGO की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई

एनजीओ सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उनके अनुसार, अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि याचिकाओं का कोई प्रभावी उत्तर नहीं दिया गया है। भूषण ने यह भी दावा किया कि कुछ पायलट Boeing 787 को सुरक्षित नहीं मानते। उन्हें आशंका है कि जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न उठता है क्योंकि जांच दल के सदस्य DGCA से हैं।

केंद्र और DGCA को नोटिस जारी

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता की याचिका पर केंद्र और DGCA को नोटिस जारी किया था। उन्होंने कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी। इस मामले में फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स और कुछ विधि छात्रों ने भी याचिकाएं दायर की हैं।

मीडिया नैरेटिव पर अदालत की टिप्पणी

कोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में मृतक पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया था। नियम से संबंधित रिपोर्ट के चयनात्मक प्रकाशन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए खुद न्यायाधीशों ने कहा कि ऐसा मीडिया नैरेटिव बन गया, जो समाज के लिए हानिकारक था। याचिकाओं में यह भी दावा किया गया है कि इस हादसे की सरकारी जांच नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है।
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