दिल्ली में मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं की बहाली
दिल्ली में हुई एक घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बडे़ निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए और इंटरनेट सेवा में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।
प्रदर्शन का संदर्भ
यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान आया, जब मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी गई थीं। रविवार को विशेष बेंच ने सुनवाई की और कहा कि कानून के तहत लोगों को आंदोलन करने का अधिकार है और उनकी आवाजाही को नहीं रोका जाना चाहिए।
कोर्ट के सवाल और निर्देश
कोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जजों ने कहा कि यदि सरकार की ओर से स्थायी रूप से कोई निर्णय लिया गया है, तो उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। इस दौरान तीन प्रमुख CJP नेताओं को 23 घंटे के बाद रिहा किया गया था, जिन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था।
प्रदर्शन और सख्त कार्रवाई
10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने क्षेत्र में बैरिकेडिंग की और 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आचरण संविधान के तहत उल्लंघन है। सभी वकील इस बात पर सहमत थे कि नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
संविधान का संरक्षण
जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहन के समक्ष सुनवाई के दौरान विभिन्न वकीलों ने यह जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। अधिकतर वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि हिरासत में लेने की प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
पुलिस के आचरण पर सवाल
वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी बिना पहचान के थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जाएगी। जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि कानून की रक्षा के लिए पुलिस को नागरिकों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मेट्रो सेवाओं का स्तर
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सभी मेट्रो स्टेशन सामान्य रूप से चालू हैं और इंटरनेट सेवा वापस लायी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा कारणों से कुछ स्टेशन बंद किए गए थे लेकिन एक बार फिर उन्हें खोला गया।
वकीलों की चिंताएं
सुनवाई में वकीलों ने यह भी बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे। कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस बागची ने कहा कि मुख्य अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा।
आखिरी निर्देश
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे हिरासत में लिए गए लोगों पर स्पष्टीकरण दें। सभी संबंधित मामलों पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि नागरिकों को अपनी आवाज उठाने का पूरा अधिकार है, बशर्ते यह कानून के दायरे में हो।
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