एथनॉल फ्यूल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, E100 की सप्लाई को लेकर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine

सरकार की नई ई100 फ्यूल पॉलिसी पर कोर्ट की नजर

हाल ही में भारत सरकार ने ई100 फ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दी है, जिससे 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों की सप्लाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार से स्पष्टता मांगी है कि कैसे ई100 फ्यूल की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। यह मामला तब सामने आया जब केंद्र सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए ई100 ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए नियमों में संशोधन किया। वर्तमान में, पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने की नीति लागू है, जिससे ई20 पेट्रोल का उपयोग हो रहा है।

ई100 फ्यूल की सप्लाई का सवाल

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले शामिल हैं, ने एथनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए एथनॉल आवंटन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया। पीठ ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यदि 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों की अनुमति दी गई है, तो उनकी सप्लाई कैसे की जाएगी। इस पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने जवाब दिया कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है। इसके तहत ई100 यानी लगभग शुद्ध एथनॉल से चलने वाले वाहनों को भी नियमों में शामिल किया गया है। इससे पहले, ई85 जैसे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन से चलने वाले वाहनों का प्रावधान था। हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा कि सरकार की पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण मौजूदा 20 प्रतिशत से तत्काल आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

किसानों के हितों पर जोर

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान पीठ ने किसानों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इस मुद्दे को व्यापक जनहित और पर्यावरण के दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, खासकर गांवों में रहने वाले किसानों के हितों पर ध्यान देना होगा। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि देश की बड़ी आबादी के नजरिये से तीसरा पहलू, जो सबसे महत्वपूर्ण लगता है, वह किसान हैं।

अगली सुनवाई की तारीख

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए टाल दी है। अदालत ने 2025-26 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए आवंटन बढ़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह मामले में अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दे पर भी बात करेंगे। इस प्रकार, यह मामला न केवल पर्यावरण और ऊर्जा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों के हितों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहलू बनता जा रहा है।

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