सड़क हादसे के मुआवजे में फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम! 4 हफ्ते में जोड़ने होंगे ये डिजिटल सिस्टम

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह के भीतर e-DAR, VAHAN, SARATHI और इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो को आपस में जोड़ने का निर्देश दिया है। इस कदम का उद्देश्य सड़क दुर्घटना मुआवजे के मामलों में फर्जी दावों पर रोक लगाना और वास्तविक पीड़ितों को जल्द मुआवजा दिलाना है। इन डिजिटल सिस्टम के जुड़ने से दुर्घटना की रिपोर्ट, वाहन और बीमा संबंधी रिकॉर्ड तथा पुराने दावों की जानकारी आसानी से साझा की जा सकेगी।

दुर्घटना के मुआवजे में धोखाधड़ी रोकने की तैयारी

सड़क दुर्घटनाओं के बाद मुआवजे के लिए किए जाने वाले दावों में फर्जीवाड़े की आशंका को रोकने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड आपस में जुड़ने से संबंधित अधिकारियों को दुर्घटना, वाहन के पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस और बीमा से जुड़ी जानकारी एक साथ मिल सकेगी। इससे दावों की जांच में मदद मिलेगी और गलत जानकारी के आधार पर मुआवजा लेने की कोशिशों पर लगाम लगाने में सहायता मिल सकती है।

चार डिजिटल सिस्टम होंगे आपस में कनेक्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक-दूसरे से जोड़ना है। e-DAR: सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट और जानकारी दर्ज करने वाला डिजिटल सिस्टम। VAHAN: वाहनों के पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड रखने वाला पोर्टल। SARATHI: ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाओं और रिकॉर्ड का डिजिटल प्लेटफॉर्म। Insurance Information Bureau (IIB): बीमा संबंधी आंकड़ों और जानकारियों के लिए काम करने वाला निकाय। इन प्रणालियों के एकीकृत होने से दुर्घटना के बाद संबंधित रिकॉर्ड तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे मुआवजे के दावों की जांच में लगने वाला समय कम करने और वास्तविक पीड़ितों को राहत पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हिट एंड रन मामलों और PM-RAHAT योजना पर भी जोर

इस व्यवस्था के दायरे में हिट एंड रन यानी ऐसे सड़क हादसे भी शामिल हैं, जिनमें वाहन चालक दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो जाता है। इसके साथ ही PM-RAHAT योजना से जुड़े मामले भी इसमें शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ा है। डिजिटल रिकॉर्ड साझा होने से ऐसे मामलों में भी संबंधित जानकारी जुटाने और प्रक्रिया को सुचारु बनाने में मदद मिल सकती है।

पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की दिशा में कदम

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का प्रमुख उद्देश्य सड़क दुर्घटना मुआवजा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाना है। चार सप्ताह की समय-सीमा में डिजिटल सिस्टम को जोड़ने से संबंधित विभागों के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सभी संबंधित विभाग इसे समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करते हैं या नहीं। यदि सिस्टम सुचारु रूप से काम करता है, तो फर्जी दावों की पहचान आसान हो सकती है और दुर्घटना में प्रभावित वास्तविक पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है।
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