Supreme Court का बड़ा फैसला: चुनाव आयोग फॉर्म 6, 7, 8 में नहीं कर सकता बदलाव

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई महत्वपूर्ण सवाल किए हैं। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पूछा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर करीब 43 लाख मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए होता है, जबकि ये लोग पहले से ही वोटर लिस्ट में शामिल थे।

Form-6 का विवाद और चुनाव आयोग की स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को स्पष्ट किया कि फॉर्म 6, 7 और 8 में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। दिल्ली में SIR से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे, लेकिन 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में केवल 97.53 लाख नाम शामिल किए गए। इससे लगभग 47.57 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर रह गए। Form-6 को लेकर विपक्ष का मुख्य आरोप है कि चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के फॉर्म में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़कर नियमों का उल्लंघन किया है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे। चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने पक्ष रखा। बेंच ने कहा कि जिन लोगों ने किसी वजह से अपना एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया, उन्हें नए वोटर मानने के बजाय उनकी स्थिति के अनुसार समाधान निकालना चाहिए।

बेंच ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल

बेंच ने यह भी कहा कि फॉर्म 6, 7 और 8 तय फॉर्मेट हैं और चुनाव आयोग इनमें बदलाव नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि राष्ट्रीय राजधानी में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने पर इतनी जल्दी (30 अक्टूबर) की समयसीमा क्यों रखी जा रही है।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए कट-ऑफ तारीख तय न करें। चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव आयोग को सिर्फ वोटरों के आवेदन का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि आयोग को खुद वोटरों तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। इसके बाद चुनाव आयोग ने आवेदन जमा करने की समयसीमा बढ़ाने की इच्छा जताई है।

दिल्ली में वोटिंग प्रक्रिया पर असर

इस फैसले का दिल्ली में वोटिंग प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ सकता है। यदि चुनाव आयोग समयसीमा को बढ़ाता है, तो इससे उन मतदाताओं को राहत मिलेगी जो पहले से वोटर लिस्ट में थे लेकिन अब ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इस दिशा में क्या कदम उठाता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि आयोग इस मुद्दे को कैसे सुलझाता है और मतदाता के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाता है। दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आयोग को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

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