CJI मानहानि केस: संजय राउत को व्यक्तिगत, निखिल वाघले को वर्चुअली पेश होने का आदेश

The CSR Journal Magazine

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना का केस दर्ज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्देश दिया कि दोनों को अगली सुनवाई में, जो 17 नवंबर को होगी, अदालत में पेश होना है। संजय राउत को खुद उपस्थित होना पड़ेगा, जबकि निखिल वागले को वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी गई है।

17 नवंबर को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 17 नवंबर को दोपहर 2 बजे दोनों को अदालत में पेश होना है। यह आदेश जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने दिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सीजेआई सूर्यकांत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर यह आपराधिक अवमानना याचिका दायर की गई है।

अटॉर्नी जनरल की सहमति

इस मामले में भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की लिखित सहमति शामिल है। उन्होंने कहा कि आरोपियों की टिप्पणियां चीफ जस्टिस सूर्यकांत के प्रति अपमानजनक थीं। इस पर सुनवाई के दौरान एससीबीए की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय और राहुल कौशिक ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं।

आरोपियों की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एससीबीए ने उन ट्वीट्स का हवाला दिया, जिसमें संजय राउत और निखिल वागले ने आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने कहा कि इन टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों को देश की सर्वोच्च अदालत का कोई सम्मान नहीं है।

बचाव पक्ष की दलीलें

पत्रकार निखिल वागले की ओर से सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने अदालत में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वागले ने अपने ट्वीट के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है और अवमानना नोटिस मिलने के बाद उन्होंने ट्वीट भी डिलीट कर दिया है। उन्होंने अपने 50 साल के करियर का भी हवाला दिया और कहा कि वह अपने कृत्य को सही साबित नहीं करना चाहते।

वर्चुअली पेशी की अनुमति

इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की कि वागले का कोर्ट में खुद पेश न होना कानूनी सलाह के आधार पर था। उन्होंने कहा कि वागले मुंबई में रहते हैं, इसलिए उन्हें वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें यह रियायत दे दी, लेकिन कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उन्हें खुद पेश होना पड़ेगा।

संजय राउत का पक्ष

सुनवाई के दौरान संजय राउत की ओर से कोई वकील नहीं पेश हुआ। हालांकि, एडवोकेट ऑन रेकॉर्ड विष्णु शर्मा ने वकालतनामा दर्ज किया था। बेंच ने संजय राउत को अगली सुनवाई पर खुद पेश होने का निर्देश दिया।

अल्बानिया का जिक्र

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वकीलों ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि संजय राउत ने एक और पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट को भी उसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जैसा अल्बानिया के कोर्ट का हुआ। अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को प्रदर्शनकारियों ने जला दिया था। इस तरह के बयान से मामला और गंभीर हो गया है।

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