महिला आरक्षण नहीं, असली मुद्दा परिसीमन है और इसकी पारदर्शिता जरूरी, सोनिया गांधी का बयान

The CSR Journal Magazine
सोनिया गांधी ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि महिला आरक्षण कोई नया मुद्दा नहीं है। यह वर्ष 2023 में ही पारित किया गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि विपक्ष ने इस मुद्दे पर कड़ी आलोचना की है। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने की मांग उठी थी, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया था।

सियासी माहौल गरम, स्पेशल सत्र की टाइमिंग पर सवाल

सोनिया गांधी ने सियासी माहौल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद के तीन दिवसीय स्पेशल सत्र की टाइमिंग को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। उन्होंने सरकार के उस कदम की आलोचना की है जिसमें प्रधानमंत्री ने विपक्ष से विधेयकों का समर्थन मांगा है। उनके अनुसार, यह अधिकतर राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया जा रहा है।

परिसीमन की असली चिंता, लोकतंत्र की पारदर्शिता

सोनिया ने बताया कि देश की संघीय व्यवस्था और दक्षिण राज्यों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का होना आवश्यक है। लोकतंत्र में सिर्फ चुनावी गणना नहीं, बल्कि निष्पक्षता भी महत्वपूर्ण होती है।

सरकारी यू-टर्न पर उठे सवाल, कब होगा लागू?

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने सरकार के यू-टर्न पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कानून को पहले ही पास किया जा चुका है और इसे जनगणना के आधार पर लागू करने की बात कही गई थी। लेकिन अब सरकार इसे 2029 में लागू करने का विचार कर रही है। यह वास्तव में एक बड़ा बदलाव है।

दक्षिण राज्यों पर परिसीमन का खतरा, बचे रहने की जरूरत

सोनिया गांधी ने परिसीमन की प्रक्रिया के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, यदि परिसीमन ठीक से नहीं किया गया तो यह दक्षिणी और छोटे राज्यों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह संविधान पर एक बड़ा हमला होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के मामले में राजनीतिक संतुलन होना जरूरी है।

जनगणना में देरी, खाद्य सुरक्षा लाभ से वंचित लोग

सोनिया ने जनगणना में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2021 की जनगणना की देरी से लगभग 10 करोड़ लोग खाद्य सुरक्षा के लाभ से वंचित रह गए। यह स्थिति देश की सामाजिक संरचना के लिए चिंता का विषय है।

जातिगत जनगणना पर भी सरकार की मंशा पर सवाल

सोनिया गांधी ने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा परिसीमन है, जबकि महिला आरक्षण को केवल एक नैरेटिव सेट करने का प्रयास माना जा रहा है। यह स्थिति व्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

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