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March 15, 2026

NSA में गिरफ्तारी से रिहाई तक…जानें सोनम वांगचुक केस की पूरी कहानी

The CSR Journal Magazine
पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल से रिहा कर दिया गया है। उन्हें लेह हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार ने अब NSA हटाकर उनकी रिहाई का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लद्दाख में शांति और आपसी विश्वास बहाल करने के लिए उठाया गया है। सोनम वांगचुक, जिन्हें पहले देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया जा रहा था, अब आजाद हैं। यही नहीं, उन्हें 6 महीने तक जोधपुर जेल में रखा गया था, लेकिन अब वे रिहा होकर बाहर आ चुके हैं। आइए, जानते हैं उनकी पूरी कहानी।

लेह हिंसा का भूगोल

2025 में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए लेह में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे थे, लेकिन अचानक हिंसा भड़क उठी। इन हिंसक प्रदर्शनों में 4 लोगों की जान गई और 22 पुलिसकर्मियों समेत कुल 45 लोग घायल हुए। इसी बवाल के बाद, 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था और उन्हें जोधपुर जेल भेजा गया।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी हालत जेल में बिगड़ गई है। 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने को कहा था। सरकारी वकील ने कहा था कि वांगचुक को रिहा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति ठीक है।

सुनवाई का गतिरोध

पिछले 5 महीने में यह केस 24 बार कोर्ट में लिस्ट किया गया, जबकि पिछले एक महीने में केंद्र सरकार के अनुरोध पर दो बार सुनवाई टाली गई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के दस्तावेज पर असंतोष जताते हुए सही ट्रांसक्रिप्ट की मांग की। कोर्ट ने कहा कि अनुवाद की सटीकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इस विवाद के चलते सुनवाई के तारीखों में बार-बार बदलाव हुआ।

रिहाई का आदेश

आखिरकार, 17 मार्च को दोबारा सुनवाई की तैयारी के बीच, सरकार ने सोनम वांगचुक की रिहाई का आदेश दिया। गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि वे निर्धारित हिरासत अवधि पूरा कर चुके हैं। सरकार ने लद्दाख में आपसी विश्वास और शांति के वातावरण को बनाए रखने का संकल्प लिया है। यही कारण है कि उनकी हिरासत को समाप्त किया गया है।

उठते सवाल

अब सवाल यह उठता है कि अगर सोनम वांगचुक को रिहा ही करना था तो उन्हें NSA में क्यों रखा गया था? क्या सरकार की ओर से गिरफ्तार करने के पीछे कोई अन्य कारण था? इस केस ने एक बार फिर लद्दाख में कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को उजागर किया है। सरकार ने वांगचुक की रिहाई का निर्णय लेते समय सभी पहलुओं पर विचार किया और फिर उनकी हिरासत को खत्म करने का निर्णय लिया।
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