अब AI, इंग्लिश और पैसों का हिसाब सीखेंगे पालघर के आदिवासी बच्चे, Sneh Asha Foundation ने शुरू किया  Jeevan Kaushalya Programme

The CSR Journal Magazine
Sneh Asha Foundation: आदिवासी बच्चों को अब सिर्फ किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं मिलेगी, बल्कि वे पैसों का सही इस्तेमाल करना, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी बोलना, डिजिटल तकनीक को समझना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों की बुनियादी जानकारी भी हासिल करेंगे। मुंबई स्थित गैर-लाभकारी संस्था स्नेह आशा फाउंडेशन (Sneh Asha Foundation) ने पालघर जिले के आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 12 सप्ताह का ‘जीवन कौशल्या’ (Jeevan Kaushalya) कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम विक्रमगढ़ और जव्हार तालुका के चार आदिवासी आवासीय स्कूलों में चलाया जाएगा। संस्था का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ जीवन में काम आने वाले जरूरी कौशल सिखाना और उनके लिए शिक्षा तथा करियर के नए अवसर तैयार करना है।

400 विद्यार्थियों की मौजूदगी में हुआ Sneh Asha Foundation कार्यक्रम का शुभारंभ

जीवन कौशल्या कार्यक्रम का उद्घाटन विक्रमगढ़ स्थित एस.के. एग्रो टूरिज्म में किया गया। इस अवसर पर करीब 400 विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध आदिवासी लोक कलाकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित भिकल्या लाडक्या धिंडा बाबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। स्नेह आशा फाउंडेशन की संस्थापक और अध्यक्ष सिद्धि चौहान जायसवाल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान पालघर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिली। भिकल्या लाडक्या धिंडा बाबा ने पारंपरिक तारपा प्रस्तुति दी, जबकि जिले के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने लोक नृत्य और पारंपरिक कला रूपों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। इस आयोजन ने आधुनिक शिक्षा के साथ स्थानीय संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखने के महत्व को भी सामने रखा।

Sneh Asha Foundation: चार स्कूलों के विद्यार्थियों को मिलेंगे पांच तरह के कौशल

जीवन कौशल्या कार्यक्रम के तहत पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें वित्तीय साक्षरता, उपयोगी अंग्रेजी, जीवन कौशल, सॉफ्ट स्किल्स और करियर की तैयारी शामिल हैं। कक्षा 5 से 10 तक के विद्यार्थियों को बचत करने, पैसों का प्रबंधन करने, प्रभावी बातचीत करने, टीम में काम करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और सही निर्णय लेने की ट्रेनिंग दी जाएगी। बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय खेल, समूह गतिविधियों, चर्चा और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए सिखाया जाएगा। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल आधारित पाठ्यक्रम और अलग-अलग करियर विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी। इसके साथ डिजिटल कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी समझ विकसित करने पर जोर रहेगा। यह कार्यक्रम विक्रमगढ़ तालुका के करहे और कुर्जे आवासीय स्कूलों तथा जव्हार तालुका के डाभोसा और विनवल आवासीय स्कूलों में लागू किया जाएगा। इसे सफल बनाने के लिए शिक्षकों, अभिभावकों, स्कूल प्रशासन और स्थानीय समुदायों को भी साथ जोड़ा जाएगा।

50 छात्राओं को मिली साइकिल, स्कूल पहुंचना होगा आसान

कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान 50 छात्राओं को साइकिलें भी वितरित की गईं। इन छात्राओं को स्कूल आने-जाने में परिवहन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साइकिल मिलने से उनका रोजाना का सफर आसान होने, स्कूल में नियमित उपस्थिति बढ़ने और शिक्षा जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। फाउंडेशन की संस्थापक और अध्यक्ष सिद्धि चौहान जायसवाल ने कहा कि किसी भी बच्चे की प्रतिभा और सपनों को उसकी परिस्थितियों के कारण सीमित नहीं होना चाहिए। आदिवासी गांव में रहने वाले बच्चे को भी तकनीक समझने, वित्तीय कौशल सीखने, आत्मविश्वास से बातचीत करने और करियर के विकल्प तलाशने का उतना ही अवसर मिलना चाहिए, जितना किसी बड़े शहर में पढ़ने वाले बच्चे को मिलता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने और आत्मनिर्भर जीवन बनाने के लिए तैयार करना भी होना चाहिए।

16,500 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है फाउंडेशन

स्नेह आशा फाउंडेशन के अनुसार, संस्था की विभिन्न शैक्षणिक पहलों से अब तक 16,500 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला है। संस्था ने मुंबई के 54 स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित करने में योगदान दिया है, जिससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा और तकनीक सीखने का अवसर मिला है। इसके अलावा, चार बैचों में 72 विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां भी दी गई हैं। पालघर में जीवन कौशल्या कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के इसी प्रयास का अगला कदम है। वित्तीय साक्षरता, अंग्रेजी संचार, डिजिटल शिक्षा और करियर मार्गदर्शन के जरिए संस्था आदिवासी बच्चों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना चाहती है।

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