राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने मुंबई क औद्योगिक क्षेत्र जवेरी बाजार में ‘ऑपरेशन गोल्ड मेल्टडाउन’ के तहत एक बड़ा ऑपरेशन चलाया। इस रेड में 5.8 किलोग्राम तस्करी किया गया सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग ₹9.22 करोड़ है। DRI की टीम ने एक सक्रिय सोना गलाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, जो लंबे समय से अवैध गतिविधियों में लिप्त था।
मोहक वैक्स कैप्सूल तकनीक
इस तस्करी किए गए सोने को अनोखे तरीके से लाया गया था। DRI की जांच के अनुसार, तस्कर इसे वैक्स कैप्सूल के जरिए भारत में लाते थे। इस तकनीक के माध्यम से सोने को छिपाना तो आसान था, लेकिन यहाँ DRI की नजर ने तस्करों के सभी प्रयासों को बार-बार विफल किया।
सटीक निगरानी और प्रभावी कार्रवाई
DRI की निगरानी और सजगता के चलते इस कार्यवाही को सफल बनाया गया। मौके से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं भी जब्त की गईं, जिनमें गुप्त गोल्ड मेल्टिंग यूनिट, तस्करी से जुड़े रिकॉर्ड, गलाने-ढालने के उपकरण और बुलियन मार्किंग डाई शामिल हैं। यह सब दर्शाता है कि तस्करी नेटवर्क कितना मज़बूत और संगठित था।
एक और तस्करी के मामले का खुलासा
इस वर्ष मुंबई में यह पहला मामला नहीं है, जब DRI ने तस्करी संबंधी गतिविधियों का पर्दाफाश किया है। पिछले कुछ महीनों में कई इसी तरह के मामलों में कार्रवाई की गई है। DRI लगातार सोने की तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है, जिससे यह साफ है कि एजेंसी तस्करों पर नजर रखने में पूरी तरह से सक्रिय है।
जनता की जागरूकता का महत्व
इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि ऐसे संगठनों के खिलाफ जागरूकता फैलाना कितना आवश्यक है। तस्करी न केवल देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि यह समाज पर भी विपरीत प्रभाव डालती है। DRI के इस तरह के प्रयासों से न केवल तस्करी पर रोक लगेगी, बल्कि इससे आम जनता को भी जागरूक किया जा सकेगा।
अगले कदम क्या होंगे?
हालांकि DRI ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन सवाल यह है कि अगला कदम क्या होगा। एजेंसी अब तस्करी के अन्य पहलुओं पर ध्यान देगी और संलग्नताओं का पता लगाने का प्रयास करेगी। इसके अलावा, तस्करों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए व्यापक जांच की जाएगी। DRI का यह अभियान दिखाता है कि देश में तस्करी के खिलाफ लड़ाई कितनी गंभीरता से की जा रही है।