अमेरिका इन दिनों भीषण शीत लहर और भारी बर्फबारी की चपेट में है। एक विशाल सर्दी के तूफान ने पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिणी राज्यों तक तबाही मचा दी है। ठंड, बर्फ और बिजली गुल होने के कारण कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग बिना बिजली के ठिठुरती रातें गुजारने को मजबूर हैं, जबकि उड़ानें रद्द, सड़कें बंद और स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
दो-तिहाई अमेरिका पर शीत लहर का कहर
अमेरिका के दो-तिहाई हिस्से में रिकॉर्डतोड़ ठंड पड़ रही है। नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक, आर्कटिक हवा का नया झोंका आने से पहले से जमी बर्फ और बर्फीली सड़कों पर हालात और बिगड़ सकते हैं। अर्कांसस से न्यू इंग्लैंड तक करीब 2,100 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में एक फुट से ज्यादा बर्फ जम चुकी है। पिट्सबर्ग के उत्तर में कई इलाकों में 20 इंच तक बर्फ गिरी, जहां तापमान माइनस 25 डिग्री फारेनहाइट (लगभग माइनस 31 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद कम है और सप्ताहांत में एक और तूफान पूर्वी तट से टकरा सकता है।

मौत का आंकड़ा बढ़ा, दर्दनाक घटनाएं सामने
इस तूफान से जुड़ी घटनाओं में अब तक कम से कम 30 लोगों की जान जा चुकी है। मैसाचुसेट्स और ओहायो में दो लोगों की मौत स्नोप्लो वाहन से कुचलने से हुई। अर्कांसस और टेक्सास में स्लेजिंग (बर्फ पर फिसलने) के दौरान किशोरों की जान गई। कंसास में एक 28 वर्षीय महिला शिक्षिका का शव बर्फ में दबा मिला, जो बिना कोट और मोबाइल के एक बार से निकलते हुए आखिरी बार देखी गई थीं। न्यूयॉर्क सिटी में भीषण ठंड के बीच खुले में आठ लोगों की मौत हुई, जिनकी वजहों की जांच जारी है। टेनेसी में चार, लुइसियाना और पेंसिल्वेनिया में तीन-तीन, मिसिसिपी में दो और न्यू जर्सी, साउथ कैरोलिना व केंटकी में एक-एक मौत दर्ज की गई है।

5 लाख से ज्यादा घरों में अंधेरा, राहत कार्य तेज
तूफान का सबसे बड़ा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। पावरआउटेज डॉट कॉम के मुताबिक, सोमवार शाम तक अमेरिका में 5.6 लाख से अधिक घरों और प्रतिष्ठानों में बिजली नहीं थी। सबसे ज्यादा नुकसान दक्षिणी राज्यों में हुआ, जहां फ्रीजिंग रेन के कारण पेड़, बिजली के खंभे और तार टूट गए। मिसिसिपी में इसे 1994 के बाद की सबसे खराब बर्फीली आंधी बताया गया है। यहां 14 घर, एक व्यवसायिक इमारत और 20 सार्वजनिक सड़कों को गंभीर नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने राहत शिविरों में कंबल, पानी, जनरेटर और बिस्तरों की व्यवस्था की है, जबकि अधिकारियों ने बिजली बहाल होने में कई दिन लगने की चेतावनी दी है।


