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March 2, 2026

दिल्ली: ‘कुछ लोग जीवन जीते हैं, कुछ उसे देखते हैं पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ का खास बयान

The CSR Journal Magazine
दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘Seeking The Infinite’ नाम की पुस्तक का विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि रहे। याकूब मैथ्यू द्वारा लिखी गई इस किताब को धनखड़ ने प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक जागरण है। इस कार्यक्रम में अनेक लेखकों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

किताब में अनुभव की विशेषता

धनखड़ ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि एक अनमोल अनुभव का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन के विभिन्न चरणों से गुजरने वाले बहुत कम लोग होते हैं, जो इसे नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करते हैं। ‘Seeking The Infinite’ उन विशेष लोगों में से एक है।

आध्यात्मिक यात्रा का अनूठा तरीका

याकूब मैथ्यू ने अपने जन्मदिन के मौके पर पारंपरिक जश्न मनाने की बजाय 17 दोस्तों के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा की योजना बनाई। यह सब लोग एक साथ कुंभ के अनुभव को समझने के लिए आए थे। पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह किताब हमें यह याद दिलाती है कि हम सभी एक सच्चाई से जुड़े हैं, भले ही हमारी भाषाएं और संस्कृतियां अलग हों।

किताब का संदेश और महाकुंभ

धनखड़ ने महाकुंभ का उल्लेख करते हुए बताया कि यह केवल एक धार्मिक सभा नहीं है, बल्कि मानवता के लिए एक जोड़ने वाला संदेश भी है। उन्होंने कहा कि अनंत केवल किसी दूर की चीज़ का नाम नहीं है, बल्कि वह हमारे अंदर का हिस्सा है।

किताब का प्रभाव और अनुभव

कार्यक्रम का संचालन कर रहे दिलीप चेरियन ने कहा कि इस किताब में कुंभ का अनुभव संक्षेप और सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उन लोगों के लिए खास है जो वहां नहीं पहुंच सके। उन्होंने बताया कि धर्म का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि बांटना।

अनंत की यात्रा का महत्त्व

याकूब मैथ्यू ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति शुद्धता से एक कार्य करता है, तो वह अपने अंत में समुद्र तक पहुंचता है। यह संदेश हमें यह समझाता है कि अनंत कोई निश्चित स्थान नहीं, बल्कि एक यात्रा है।

आध्यात्मिक विचारों का समागम

‘Seeking The Infinite’ पुस्तक भौतिक और आत्मिक चिंतन के बीच एक सेतु का कार्य करती है। यह न तो उपदेश देती है और न ही किसी सिद्धांत का पालन कराती है, बल्कि सोचने के लिए मजबूर करती है। कार्यक्रम का अंत सभी को बधाई देने के साथ हुआ और यह संदेश दिया गया कि खोज की यह यात्रा निरंतर चलती रहनी चाहिए।
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