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February 8, 2026

गिरिडीह में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का बड़ा हथियार जखीरा बरामद किया, जिसमें पुरानी राइफलें भी शामिल हैं।

The CSR Journal Magazine
गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को नक्सलियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एक संयुक्त अभियान के दौरान भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। जानकारों के अनुसार, इनमें 2008 में लूटी गई राइफलें भी शामिल हो सकती हैं। यह खोज गिरिडीह के खुखरा थाना क्षेत्र के पास हुई, जहां नक्सलियों ने इन सामानों को जमीन के अंदर गाढ़ दिया था।

संयुक्त ऑपरेशन का प्लान

गृह मंत्रालय द्वारा नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की इजाजत मिलने के बाद, गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ ने इस अभियान को अंजाम दिया। शनिवार को गिरिडीह के एसपी डॉक्टर विमल कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर नक्सलियों के खिलाफ एक सर्च ऑपरेशन किया गया था।

हथियारों की बरामदगी

इस सर्च ऑपरेशन में पारसनाथ पहाड़ी के भालकी पहाड़ी और कानेडीह क्षेत्र में बीडीडीएस टीम की सहायता से नक्सलियों द्वारा छिपाए गए सामानों को बरामद किया गया। इसमें 303 बोल्ट एक्शन सिंगल शॉट राइफल की 11 पीस, प्वाइंट 22 राइफल की 9 पीस, 6 ग्रेनेड और अन्य इन्वेंट्री शामिल हैं। यह सभी सामान लगभग 15 फिट गहरे गड्डे में छिपा रखा गया था।

नक्सलियों का बढ़ता प्रभाव

एसपी डॉ. बिमल कुमार के अनुसार, सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि इलाके में हार्डकोर नक्सलियों का मूवमेंट तेजी से बढ़ रहा है। वह नए सिरे से क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाने के प्रयास में थे। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था।

2008 की लूट का पर्दाफाश?

सुरक्षा बलों द्वारा बरामद किए गए हथियारों की जांच की जा रही है। इन राइफलों का संबंध वर्ष 2008 में गिरिडीह के पचंबा थाना क्षेत्र में होम गार्ड कैंप से लूटे गए सामानों से हो सकता है। उस समय नक्सलियों ने गौशाला मेला का सहारा लेकर होम गार्ड कैंप पर हमला किया था और 134 राइफल लूट ली थीं। इस अंदाजे से यह माना जा रहा है कि बरामद हथियार उसी लूट का हिस्सा हो सकते हैं।

सुरक्षा बलों की सतर्कता

गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की इस सफलता से उम्मीद जगी है कि नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियानों में और भी प्रभावी नतीजे मिलेंगे। यह ऑपरेशन न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा का एक रूप प्रदान करता है, बल्कि यह नक्सलियों के नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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