‘सरके चुनर’ विवाद पर रक्षिता का बयान, ‘चोली के पीछे’ से किया मजेदार मुकाबला

The CSR Journal Magazine
फिल्म ‘केडी द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस गाने ने सोशल मीडिया पर बहुत चर्चाएँ पैदा की हैं। लोग इस गाने पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं और कई मुद्दों को उठाते नजर आ रहे हैं। विवाद के इस माहौल में, फिल्म की निर्माता रक्षिता ने खुलकर अपनी राय रखी है।

रक्षिता ने किया तीखा जवाब

रक्षिता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह गाना किसी भी संदर्भ में गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब लोग ‘चोली के पीछे’ गाने की बात करते हैं, तो ऐसे में उनके गाने की तुलना क्यों नहीं की जा रही है। रक्षिता का कहना है कि गाने में कोई गलत इरादा नहीं है और इसे बिना किसी पूर्वाग्रह के समझा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर चल रही बहस

गाने को लेकर कई लोगों ने अपनी सोच साझा की है। कुछ लोग इसे कला के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक बताया है। सोशल मीडिया पर रक्षिता के बयान ने कई लोगों का ध्यान खींचा है। लोग उनके साथ सहमति और असहमति दोनों जता रहे हैं। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बॉलीवुड में ऐसे गानों के खिलाफ चर्चा शुरू कर दी है।

संस्कृति और मौजूदा रुझान

इस प्रकार के गाने अक्सर भारतीय संस्कृति और परंपरा को लेकर बहस का विषय बन जाते हैं। कला और मनोरंजन के बीच की रेखा को समझना महत्वपूर्ण है। रक्षिता के बयान से कपड़ों और महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर चल रही बहस को एक नया मोड़ मिला है। वे मानती हैं कि कला को किसी भी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए।

क्या है ‘चोली के पीछे’ की कहानी?

‘चोली के पीछे’ गाना भी अपने समय में काफी विवादास्पद रहा था। इसे लंबे समय तक भारतीय सिनेमा का एक प्रमुख हिस्सा माना गया है। रक्षिता ने इस गाने को उदाहरण के तौर पर पेश किया है, यह दिखाने के लिए कि कैसे समाज ने कला को हमेशा से अलग नजरिये से देखा है। गाने का मजेदार फ़्लैश बैक और आज के संदर्भों में तुलना कर रक्षिता ने एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।

फिल्म और इसके कंटेंट की भारी चर्चा

फिल्म ‘केडी द डेविल’ अपने विषय और संगीत के कारण चर्चित रही है। जबकि गीत ‘सरके चुनर’ ने इसे और भी ज्यादा चर्चित बना दिया है। लोग इस फिल्म के कंटेंट, गानों और उनके अर्थ पर बहस कर रहे हैं। यह न सिर्फ एक मनोरंजन का साधन है बल्कि समाज में चल रही डिबेट का हिस्सा भी बन गया है।

एक नया दृष्टिकोण

रक्षिता का बयान निश्चित रूप से एक नया दृष्टिकोण है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है। क्या वास्तव में हम कला को उस नजरिये से देख रहे हैं, जैसा हमें देखना चाहिए? यह सवाल अब सभी के दिमाग में घूम रहा है। इस विवाद ने एक बार फिर से दिखाया है कि कैसे गाने और फिल्में समाज में अपनी छाप छोड़ सकती हैं।
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