भारत की रहने वाली सरबजीत कौर, जिन्होंने पाकिस्तान जाकर इस्लाम धर्म अपनाने के बाद नासिर हुसैन से निकाह किया, अब एक संवेदनशील कूटनीतिक और कानूनी मामले का रूप ले चुकी हैं। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय मानवीय आधार पर भारत वापसी रोकने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि वीज़ा उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय क़ानून को लेकर विवाद तेज़ हो गया है।
मानवीय आधार पर भारत वापसी रोकने की कोशिश
पाकिस्तान के गृह मामलों के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) के मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की बात कही है। सरबजीत का कहना है कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म अपनाया है और भारत में मुसलमानों के लिए हालात कठिन हैं, इसलिए उन्हें वापस भारत न भेजा जाए।
तलाल चौधरी के अनुसार, गृह मंत्रालय इस तथ्य पर भी विचार कर रहा है कि सरबजीत इस समय लाहौर के ‘दारुल अमन’ में रह रही हैं और उनका आवेदन विदेश मंत्रालय की राय के साथ विचाराधीन है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा हालात में उनके वीज़ा की अवधि बढ़ाई जा सकती है या अतिरिक्त वीज़ा सुविधाएं दी जा सकती हैं। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

वीज़ा नियमों और अंतरराष्ट्रीय क़ानून पर विवाद
सरबजीत कौर के मामले ने वीज़ा नियमों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख सरदार महेंद्रपाल सिंह ने इस मुद्दे पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। उन्होंने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरबजीत के निर्वासन की मांग की है।
उनका कहना है कि सरबजीत तीर्थयात्रा वीज़ा पर पाकिस्तान आई थीं, न कि विज़िट वीज़ा पर। ऐसे में वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद उनका रुकना अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति तीर्थयात्रा के बहाने किसी देश में जाकर धर्म परिवर्तन कर वहीं रुक जाए, तो क्या उसे अनुमति दी जा सकती है? उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने सिखों के एक पवित्र धार्मिक आयोजन को विवादास्पद बना दिया है।

हिरासत, कोर्ट आदेश और जांच की परतें
चार नवंबर को पाकिस्तान पहुंचने वाली सरबजीत का वीज़ा 13 नवंबर तक वैध था, लेकिन वे भारत वापस नहीं लौटीं। इसके बाद पाकिस्तानी एजेंसियों ने शेखूपुरा के एक गांव से उन्हें और उनके पति नासिर हुसैन को हिरासत में लिया। फिलहाल, वे लाहौर के दारुल अमन में रह रही हैं।
लाहौर हाई कोर्ट ने नवंबर में सरबजीत की याचिका पर पंजाब पुलिस को उन्हें परेशान न करने का आदेश दिया था। अदालत ने साफ कहा था कि जब तक मामला विचाराधीन है, दंपति की निजी ज़िंदगी में दखल न दिया जाए। हालांकि, पुलिस का दावा है कि उन्होंने किसी तरह की ज़बरदस्ती या उत्पीड़न नहीं किया।
इस बीच, ख़ुफ़िया एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इस मामले में कोई सुरक्षा पहलू जुड़ा है। हालांकि, पाकिस्तानी गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सरबजीत के खिलाफ किसी जासूसी के आरोप की पुष्टि नहीं है।


