वेस्ट यूपी के बागपत जिले में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में विश्व हिंदू परिषद की नेत्री साध्वी प्राची ने कई विवादित बयान दिए। उन्होंने कहा कि जिस दिन दिल्ली में बैठे दो गुजराती ठान लेंगे, उस दिन ओवैसी की बात छोड़िए, जालीदार टोपी भी ‘राधे-राधे’ बोलेगी। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
बाबरी मस्जिद पर साध्वी का दांव
साध्वी प्राची ने भाषण के दौरान बाबरी मस्जिद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जैसे हमने साढ़े पांच सौ साल पुराना बाबरी ढांचा हटा दिया था, वैसे ही इस बाबरी को भी धीरे से हटा देंगे। उनके इस दावे से पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनावों में सियासी गरमी देखने को मिल सकती है।
कश्मीर में हिंदुओं की स्थिति
कश्मीर मुद्दे पर बोलते हुए साध्वी प्राची ने कहा कि अगर कश्मीरी पंडितों ने घाटी में हथियार उठा लिए होते, तो कश्मीर हिंदुओं से खाली नहीं होता। यह बयान भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। साध्वी ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वालों पर भी आरोप लगाया कि उनका न धर्म एक है और न बाप एक है।
हिंदू राष्ट्र की परिभाषा
साध्वी प्राची ने मोहन भागवत के हक में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भागवत ने जनसंख्या को लेकर जो कहा, वह बिल्कुल सही है। हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का तूफान
साध्वी प्राची के बयानों के बाद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने इसे भड़काऊ और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला करार दिया, जबकि कुछ समर्थकों का कहना है कि यह बयान उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं। बागपत से उठी यह सियासी बयानबाजी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस का विषय बनती दिख रही है।