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February 16, 2026

बजरंग सेतु की नई पहचान: ऋषिकेश में ग्लास वॉक के साथ गंगा का अद्भुत नजारा

The CSR Journal Magazine
ऋषिकेश में 93 साल पुराने लक्ष्मण झूला के बाद अब ‘बजरंग सेतु’ ने नई पहचान बना ली है। 57 मीटर नीचे बहती गंगा और ऊपर कांच का पारदर्शी डेक इस पुल को अद्वितीय बनाते हैं। केदारनाथ मंदिर के डिजाइन को ध्यान में रखते हुए बने पाइलंस भी इसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं। हाल ही में ग्राउंड जीरो पर दुबारा रौनक लौट आई है। अधिकारी बताते हैं कि यह देश का अनूठा सस्पेंशन ब्रिज है। हालांकि, आधिकारिक उद्घाटन का इंतजार है, लेकिन पुल को सीमित आवाजाही के लिए खोला गया है। इससे स्थानीय बाजारों में चहल-पहल लौट आई है।

ग्लास वॉक: एक अनोखा अनुभव

बजरंग सेतु का ग्लास वॉक पुल के किनारों पर 1.5 मीटर चौड़ी पट्टी में 65 मिमी मोटा टफन ग्लास लगाया गया है। यह मल्टी-लेयर सुरक्षा तकनीक से तैयार किया गया है, जिससे इसे भारी दबाव सहन करने की क्षमता है। चलते समय ऐसा हसास होता है जैसे आप हवा में तैर रहे हों। नीचे बहती गंगा की धाराएं साफ नजर आती हैं, जबकि बनाए गए ‘व्यू प्वाइंट’ और भी खास बनाते हैं। यहां रेलिंग बाहरी ओर निकली हुई है, जिससे पर्यटक सुरक्षित तरीके से घाटी और पहाड़ों का नजारा ले सकें।

केदारनाथ से मिलती जुलती संरचना

ऋषिकेश को चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए पुल के प्रवेश द्वार और पाइलंस का डिजाइन केदारनाथ मंदिर की आकृति में तैयार किया गया है। यह धार्मिक आभा से भरा है और यहां कदम रखते ही श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर जैसा एहसास होता है।

स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट

पुराने लक्ष्मण झूला पुल पर अक्सर यातायात जाम की समस्या बनी रहती थी। नए बजरंग सेतु में बीच की दो लेन हल्के वाहनों के लिए और दोनों किनारों पर पैदल यातायात के लिए ग्लास वॉकवे बनाया गया है। इससे सुरक्षा बनी रहेगी और जाम की समस्या कम होगी।

लौटी रौनक और व्यवसाय में वृद्धि

2019 में लक्ष्मण झूला को असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था, जिससे बाजार में सन्नाटा छा गया था। अब बजरंग सेतु के खुलने पर बाजार फिर से हलचल में है। स्थानीय कारोबारी इसे आजीविका की ‘संजीवनी’ मान रहे हैं।

इंजीनियरिंग की चुनौती

बजरंग सेतु का निर्माण 132.30 मीटर लंबे स्पान वाले पुल का निर्माण 2022 में शुरु हुआ था। तेज बहाव और घाटी की चुनौतियों ने इसे खड़ा करने में कठिनाई प्रस्तुत की। अब मुख्य ढांचा तैयार है और फिनिशिंग का कार्य जारी है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि 28 फरवरी तक इसे जनता को समर्पित कर दिया जाए।

नई तकनीक से सुरक्षा

पुल के डेक में फाइबर रिइन्फोर्स्ड पॉलिमर (एफआरपी) का उपयोग किया गया है, जो हल्का और मजबूत होने के साथ जंग-रोधी भी है। इसे 500 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर भार सहने के लिए डिजाइन किया गया है। सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ग्लास वॉकवे के किनारों पर मजबूत रेलिंग लगी है। इसके अलावा, पैदल मार्ग और वाहनों के लिए अलग लेन बनाए गए हैं, जिससे दोनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित होती है। अधिकारियों का कहना है कि यह पुल न केवल पर्यटन और श्रद्धालुओं के अनुभव को बढ़ाएगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों का भी उदाहरण पेश करेगा।
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