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February 5, 2026

कड़े अब बन गए ख़तरे की पहचान लूट के डर से राजस्थान के गांवों में महिलाओं ने छोड़ी परंपरागत चांदी की ज्वैलरी

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों और लगातार हो रही लूट की घटनाओं ने ग्रामीण महिलाओं में दहशत फैला दी है। सवाईमाधोपुर से शुरू हुई कड़े काटने की वारदातों का असर अब कोटा, झुंझुनूं और अन्य जिलों तक पहुंच गया है, जहां सुरक्षा के डर से महिलाएं पुश्तैनी जेवर उतारने को मजबूर हैं।

गांव-गांव फैलता खौफ, सन्नाटे में ढलती ज़िंदगी

सवाईमाधोपुर जिले में चांदी के कड़े काटकर लूट की घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बन गया है। अब यह दहशत कोटा और झुंझुनूं जैसे जिलों तक फैल चुकी है।
महिलाएं अकेले खेतों पर जाने से कतराने लगी हैं और पुरुष भी समूह में निकलना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। दिनदहाड़े लूट की आशंका ने गांवों की रोज़मर्रा की रफ्तार को थाम दिया है।

आर्टिफ़िशियल ज्वैलरी की मजबूरी

लुटेरों के डर से अब शादियों और त्योहारों में असली सोने-चांदी की जगह आर्टिफ़िशियल ज्वैलरी पहनने का चलन बढ़ रहा है।
कोटा जिले की सांगोद निवासी संतोष सुमन का कहना है कि एक-डेढ़ तोला सोने के गहने पहनकर बाहर निकलना भी जोखिम भरा लगने लगा है।
बुजुर्ग महिला ग्यारसी बाई बताती हैं कि उनके पास किलो भर के पुश्तैनी आभूषण हैं, लेकिन परिवार ने सुरक्षा के चलते उन्हें पहनने से रोक दिया है। गाडि़या लुहार समाज की महिलाएं भी अपने जेवर संदूक और तिजोरियों में छुपाने को मजबूर हैं।

हर समाज पर असर, पहचान ही बन गई जोखिम

मीणा, बैरवा, प्रजापति, गुर्जर और बंजारा समाज में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी परंपरागत रूप से चांदी के गहने पहनते हैं।
झुंझुनूं जिले के पचलंगी की केला देवी और संजना बंजारा बताती हैं कि बढ़ती कीमतों और लूट की घटनाओं ने उन्हें गहनों का परित्याग करने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि व्यापार के सिलसिले में गांव-गांव जाना पड़ता है और हर समय खतरा बना रहता है। जो गहने पहचान और गौरव का प्रतीक थे, वही अब डर की वजह बन गए हैं।

जागरूकता की पहल, परंपरा बचाने की कोशिश

चांदी के बढ़ते भाव और सुरक्षा खतरे को देखते हुए सिरोही जिले के आबूरोड क्षेत्र में गरासिया समाज ने महिलाओं को जागरूक करने का निर्णय लिया है।
गरासिया समाज विकास सेवा समिति ने गांव-गांव बैठकें कर चांदी-सोने के आभूषण पहनते समय बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों पर चर्चा करने की योजना बनाई है। हालांकि महिलाओं का कहना है कि राजस्थान में कड़े पहनना सिर्फ़ गहना नहीं, पहचान और परंपरा है, लेकिन मौजूदा हालात में जान की सुरक्षा के लिए परंपरा छोड़ने की मजबूरी खड़ी हो गई है।
राजस्थान के गांवों में चांदी के कड़े अब आभूषण नहीं, ख़तरे की निशानी बनते जा रहे हैं। बढ़ती लूट और सुरक्षा के अभाव ने महिलाओं को अपनी परंपरा से दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया है, जिससे गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक तस्वीर भी बदलती दिख रही है।

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