Rajasthan: सोजत की मेहंदी फैक्ट्रियों में नकारात्मक असर, 250 करोड़ का ऑर्डर अटका

The CSR Journal Magazine
मारवाड़ की जान मानी मेहंदी का कारोबार अब मुश्किलों का सामना कर रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती तनाव की वजह से राजस्थान के सोजत स्थित मेहंदी उद्योग की हालत धीरे-धीरे खराब हो रही है। यहां की 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन 80% कम हो चुका है। निर्यातक व्यापारी इस समय करीब 250 करोड़ रुपए का माल पोर्ट और गोदामों में फंसा पाए हैं। काम नहीं होने की वजह से 2200 मजदूरों को घर लौटना पड़ा है।

कम उत्पादन से तंगी

वर्तमान में सोजत की बड़ी फैक्ट्रियों में से 35 ऐसे हैं जो मुख्य रूप से मध्य पूर्व के लिए नेचुरल मेहंदी और हेयर डाई का उत्पादन करते हैं। पिछले महीने से एक्सपोर्ट ठप है, जिसके चलते उत्पादन अब 20% पर आ चुका है। व्यापारी नितेश अग्रवाल का कहना है कि यह स्थिति कोरोना के समय के बाद सबसे ज्यादा खराब है।

अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

काम बंद होने के कारण 2200 मजदूरों को घर भेजना पड़ा है, जिनमें 80% श्रमिक उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान से हैं। इन मजदूरों के लिए मेहंदी सीजन ही कमाई का आधार होता है। अब उन्हें पलायन करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।

महंगा माल और बंटाधार

निर्यातक विनोद लोढ़ा के अनुसार, मुंबई और दिल्ली एयर कार्गो में लगभग 150 करोड़ का माल फंस गया है। युद्ध के कारण शिपिंग कंपनियों ने माल भाड़ा दोगुना कर दिया है। पुराने भेजे गए माल का पेमेंट भी समय पर नहीं मिल पा रहा। रमजान के बाद के सभी ऑर्डर युद्ध के कारण रोक दिए गए हैं।

कच्चे माल की महंगाई

मेहंदी के रोज़मर्रा के इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत भी बढ़ गई है। युद्ध की वजह से गुजरात से आने वाले मटेरियल की कीमत उच्च स्तर तक पहुंच गई है। जो मटेरियल पहले 250 रुपए किलो में मिलता था, अब वह 350 रुपए तक पहुँच गया है।

व्यापारियों की दुविधा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ढ़ील और डिमांड की कमी से व्यापारी अपनी फिनिश्ड गुड्स की कीमत नहीं बढ़ा पा रहे हैं। लागत में 40% तक की बढ़ोतरी होने के बावजूद उन्हें पुराने रेट पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। घरेलू स्तर पर माल भेजने में भी परेशानी आ रही है।

ग्लोबल मार्केट का संकट

सोजत की मेहंदी केवल भारत या खाड़ी देशों तक ही सीमित नहीं है; यह यूरोप, फ्रांस, आयरलैंड, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी अपनी पहुंच बना चुकी है। लेकिन मौजूदा युद्ध की स्थिति ने 130 देशों के इस नेटवर्क को प्रभावित किया है।

गुणवत्ता की चिंता

व्यापारियों के अनुसार, मेहंदी कोन की लाइफ महज एक महीने होती है। यदि युद्ध लंबा चला, तो व्यापारियों को भारी नुकसान हो सकता है।

स्थानीय श्रमिकों की स्थिति

कोटपूतली तथा दूसरी जगहों से आने वाले श्रमिकों के लिए मेहंदी का सीजन ही आय का मुख्य जरिया है। अब स्थिति यह है कि वे कार्य की कमी के कारण पलायन करने के लिए मजबूर हैं।

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