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February 15, 2026

58 साल की शादी बाद तलाक की चाह, कोर्ट ने क्यों कहा नहीं?

The CSR Journal Magazine
राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अनोखा मामला सुना, जहां 58 साल से शादीशुदा एक कपल ने तलाक की अर्जी दी थी। कोर्ट ने इस अपील को खारिज करते हुए कहा कि छोटी-मोटी अनबन को क्रूरता नहीं माना जा सकता। जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि इस तरह के विवादों से न केवल पत्नी बल्कि पूरे परिवार को दुख होगा। परिवार की इज्जत इस मामले में बहुत जरूरी मानी गई है।

शादी की लंबी उम्र पर उठे सवाल

यह शादी 29 जून 1967 को हुई थी और 2013 तक दोनों ने बिना किसी खास शिकायत के जीवन गुजारा। लेकिन एक अर्जी के अनुसार, पति ने 2014 में पत्नी के खिलाफ दहेज़ उत्पीड़न का मामला दर्ज करने का आरोप लगाया। इसके बाद से दोनों के बीच में अनबन शुरू हुई। पति का कहना था कि पत्नी ने उसे बेइज्जती में डाल दिया।

पत्नी का पक्ष: संपत्ति का झगड़ा

पत्नी का कहना है कि उसका पति परिवार की संपत्ति का गलत इस्तेमाल कर रहा है और वह इसे अपने छोटे भाई के दबाव में आकर तलाक के लिए अर्जी दे रहा है। उसने भी पति पर अवैध संबंध रखने का आरोप लगाया और कहा कि इसकी वजह से झगड़ा हुआ। पत्नी ने यह भी दावा किया कि जिस संपत्ति के लिए विवाद हो रहा है, वह उसने खुद खरीदी थी।

कोर्ट का फैसला: तलाक के लिए नहीं हैं उचित कारण

कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि शादी के कई दशकों के अनुभव के बाद, कपल की मानसिक सहनशीलता और समझ बढ़ी होगी। परिवार में संपत्ति का विवाद सामान्य है लेकिन यह तलाक का ठोस आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच झगड़े को हल करने की बजाय तलाक की दिशा में जाना उचित नहीं है।

मामले का प्रभाव: सामाजिक दृष्टिकोण

इस फैसले ने समाज में इस बात की चर्चा बढ़ा दी है कि रिश्तों में तकरार के बावजूद तलाक की ओर नहीं बढ़ना चाहिए। अदालत ने समाज में पारिवारिक मूल्यों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

लंबे रिश्ते की अहमियत

इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या लंबे समय तक साथ रहने के बाद दिक्कतें शादी के बंधन को कमजोर नहीं करतीं? कपल की स्थिति ने यह दर्शाया कि रिश्तों में धैर्य और सहनशीलता का महत्व है।
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