राजस्थान मे पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, चुनाव आयुक्त और सचिव को अवमानना नोटिस

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त और सचिव को अवमानना नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि तय समयसीमा के बावजूद चुनाव कार्यक्रम आगे बढ़ाना गंभीर मामला है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, चार हफ्ते में जवाब तलब

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनावों में देरी को गंभीरता से लेते हुए राज्य चुनाव आयोग पर सख्ती दिखाई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और सचिव राजेश वर्मा को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने साफ कहा कि उसके पूर्व आदेश की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न्यायालय के आदेश की अवमानना है।

15 अप्रैल की समयसीमा पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल उठाया कि जब पहले ही 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था, तो उसके बावजूद मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम इस तारीख के बाद तक क्यों तय किया गया। कोर्ट ने माना कि इस तरह का कार्यक्रम तय करना सीधे-सीधे आदेश की अवहेलना है। अदालत की इस टिप्पणी से साफ है कि वह प्रशासनिक लापरवाही को गंभीरता से देख रही है और जवाबदेही तय करना चाहती है।

याचिकाकर्ता का आरोप, जानबूझकर हो रही देरी

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील पुनीत सिंघवी ने अदालत को बताया कि 22 अप्रैल तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम तय किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं होगा। उन्होंने इसे संविधान और अदालत के आदेश की खुली अवमानना बताया।

सरकार की सफाई और कोर्ट की नाराजगी

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने के लिए आवेदन दायर किया जाएगा। हालांकि, इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आवेदन बाद की प्रक्रिया है, पहले यह स्पष्ट किया जाए कि तय समयसीमा के बाद का कार्यक्रम क्यों जारी किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला प्रथम दृष्टया अवमानना का बनता है, इसलिए नोटिस जारी किया गया है।

पहले भी तय हो चुकी है समयसीमा

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को दिए अपने फैसले में राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी हाईकोर्ट के निर्देशों को बरकरार रखा था। अब इस पूरे मामले में न्यायालय की सख्ती से यह साफ हो गया है कि चुनाव में देरी पर प्रशासन को जवाब देना ही होगा।

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