app-store-logo
play-store-logo
January 1, 2026

राजस्थान निकाय चुनाव न्यूनतम शिक्षा की शर्त पर सियासी घमासान, सरकार के सामने मुश्किल फ़ैसला

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में प्रस्तावित शहरी निकाय चुनाव से पहले पार्षद उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया है। सरकार के इस प्रस्ताव का जनप्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों का एक बड़ा वर्ग विरोध कर रहा है। खुद स्वायत्त शासन मंत्री ने असहमति की बात स्वीकार की है, जिससे सरकार के यू-टर्न की अटकलें तेज़ हो गई हैं।

चुनाव से पहले क्यों भड़का विवाद

राज्य सरकार शहरी निकायों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से पार्षद उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत दसवीं या बारहवीं पास होना अनिवार्य किया जा सकता है। जैसे ही यह बात सार्वजनिक हुई, शहरी राजनीति में हलचल मच गई। कई मौजूदा पार्षद और टिकट की तैयारी कर रहे नेता इस शर्त से खुद को बाहर होता देख नाराज़ हैं। उनका मानना है कि इस फैसले से जमीनी स्तर पर काम करने वाले अनुभवी नेताओं के साथ अन्याय होगा।

मंत्री के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी

स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि इस प्रस्ताव से सभी सहमत नहीं हैं। मंत्री के मुताबिक, बड़ा तबका ऐसा है जो किसी भी तरह की शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता के खिलाफ़ है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर पार्टी और सरकार के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। मंत्री ने बताया कि वे इस विषय में मुख्यमंत्री से चर्चा कर चुके हैं और सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

विरोध करने वालों के तर्क क्या हैं

न्यूनतम शिक्षा की शर्त का विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि जब विधानसभा और लोकसभा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण चुनावों में कोई शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है, तो फिर शहरी निकाय जैसे अपेक्षाकृत छोटे चुनावों में यह शर्त क्यों थोपी जा रही है। उनका तर्क है कि जनप्रतिनिधि की असली कसौटी जनता का विश्वास और काम का अनुभव होता है, न कि केवल डिग्री। कई पार्षद तीन से छह बार तक चुनाव जीत चुके हैं और क्षेत्र की समस्याओं व प्रशासनिक प्रक्रिया की गहरी समझ रखते हैं। ऐसे अनुभवी जनप्रतिनिधियों को सिर्फ शिक्षा के आधार पर चुनाव लड़ने से रोकना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ़ बताया जा रहा है।

सरकार की सोच और आगे की राह

सरकार का मानना है कि शहरी निकायों का दायित्व लगातार बढ़ रहा है। स्मार्ट सिटी, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन और अन्य केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए तकनीकी समझ और प्रशासनिक ज्ञान ज़रूरी है। इसी सोच के तहत शैक्षणिक योग्यता की शर्त पर विचार किया गया है। फिलहाल राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों में किसी प्रकार की न्यूनतम शिक्षा अनिवार्य नहीं है। सरकार “एक राज्य–एक चुनाव” की दिशा में भी काम कर रही है, जिसके तहत सभी शहरी निकायों में एक साथ चुनाव कराने की तैयारी है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि सरकार सियासी दबाव के आगे झुकती है या फिर सुधार के नाम पर कड़ा फैसला लेती है। न्यूनतम शिक्षा की शर्त पर अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में राजस्थान की शहरी राजनीति की दिशा तय करेगा।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos