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February 16, 2026

राजस्थान में Operation Sindoor की तर्ज पर होगी बमबारी: आसमान में नजर आएगा नया एयरक्राफ्ट

The CSR Journal Magazine
राजस्थान के बॉर्डर इलाके में नई तकनीक से बमबारी का अभ्यास किया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तर्ज पर दुश्मनों के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए खास तैयारी की गई है। इस विशेष अभ्यास में एक नया एयरक्राफ्ट दिखाई देगा, जो बाज की तरह आसमान में मंडराएगा और पटाक्षेप के लिए तुरंत हमले कर सकेगा। इस रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट की खासियत है कि यह पलक झपकते ही अपने टारगेट को समाप्त कर सकता है। इसके साथ ही, 277 अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

वायु शक्ति-2026 का भव्य आयोजन

जैसलमेर के पोकरण में 27 फरवरी को भारतीय वायुसेना अपनी ताकत दिखाएगी। इस अभ्यास का नाम ‘वायु शक्ति-2026’ रखा गया है, जो हर दो साल में आयोजित किया जाता है। इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के आने की भी उम्मीद है। इस दौरान आत्मनिर्भरता के साथ-साथ वायुसेना की तकनीक और मारक क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा।

हथियारों का अचूक प्रदर्शन

इस बार वायुसेना द्वारा किया जाने वाला अभ्यास सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश देने का प्रयास है कि भारतीय वायुसेना दुश्मन के ठिकानों में घुसकर हमला करने की पूरी क्षमता रखती है। इस अभ्यास में 12 हजार किलो बारूद का उपयोग किया जाएगा, जिससे बॉर्डर क्षेत्र में खास गतिविधि देखने को मिलेगी। वायुसेना के 77 फाइटर जेट्स और 43 हेलिकॉप्टर्स को इस अभ्यास के लिए तैनात किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना कई मोर्चों पर रणनीतिक हमला करने के लिए तैयार है।

पहली बार दिखेगा मानवरहित एयरक्राफ्ट

सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस बार रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA) को इतने बड़े स्तर पर पहली बार प्रदर्शित किया जाएगा। भविष्य के युद्धों में ड्रोन और इस तरह के एयरक्राफ्ट की भूमिका महत्वपूर्ण होने जा रही है। ‘वायु शक्ति-2026’ में कामिकेज ड्रोन और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) जैसे एडवांस वेपन सिस्टम का प्रयोग किया जाएगा, जो सभी मौसम में काम करने की क्षमता रखते हैं।

आपातकाल में सहायता पहुंचाने की क्षमता

इस अभ्यास में सिर्फ हमले की तैयारी ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और एयरलिफ्ट की भूमिका को भी मजबूती दी जाएगी। कठिन परिस्थितियों में एयरफोर्स की सहायता पहुंचाने की क्षमता को निखारने का लक्ष्य रखा जाएगा। इस तरह के अभ्यास सैन्य रणनीतियों को सामरिक नतीजों में बदलने की क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। भारतीय वायुसेना का यह विशेष अभ्यास न केवल तकनीकी ज्ञान का प्रतीक है, बल्कि यह देश की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

दुनिया को ताकत का एहसास

यह पूरी तैयारी दिखाने के पीछे का उद्देश यह भी है कि भारतीय वायुसेना अपनी क्षमता को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करे। इस युद्धाभ्यास में स्वदेशी और आधुनिक हथियारों का समन्वय देखना महत्वपूर्ण होगा। 27 फरवरी को होने वाले इस अभ्यास को देखना अद्भुत होगा, जहां तकनीक और दस्ते की तालमेल का जादू देखने को मिलेगा।
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