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February 26, 2026

अब AI रखेगा ट्रेनों की सफाई पर नजर: रेलवे की नई OBHS नीति से बदलेगी यात्रियों की तकदीर

The CSR Journal Magazine
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में साफ-सफाई, लिनेन सेवा और यात्री सुविधाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय रेलवे के तहत रेलवे बोर्ड ने नई ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत अब ट्रेनों की सफाई, चादर-कंबल, कोच सुविधाएं और निगरानी व्यवस्था एक ही एजेंसी के जिम्मे होगी। इससे जवाबदेही तय होगी और सेवाओं में एकरूपता आएगी।

 AI करेगा निगरानी, हर काम होगा रिकॉर्ड

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत है AI आधारित निगरानी प्रणाली। सफाईकर्मियों को अपने काम की जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो मोबाइल एप पर अपलोड करनी होगी। यानी कब, कहां और कैसे सफाई हुई – हर चीज डिजिटल रिकॉर्ड में होगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि लापरवाही की कोई गुंजाइश भी नहीं बचेगी।

 रायबरेली से होगी शुरुआत, वंदे भारत भी शामिल

यह नई व्यवस्था पहले चरण में हर रेलवे जोन की पांच चुनिंदा ट्रेनों में लागू की जाएगी। उत्तर-मध्य रेलवे क्षेत्र में रायबरेली सेंट्रल और ऊंचाहार जैसे स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों में यह प्रणाली शुरू होगी। इसमें हाई-प्रोफाइल ट्रेनें जैसे वंदे भारत एक्सप्रेस भी शामिल होंगी। यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

 सफाई का नया शेड्यूल: हर घंटे नजर

नई OBHS नीति में सफाई के लिए सख्त और स्पष्ट शेड्यूल तय किया गया है।
  • शौचालयों की सफाई सुबह 6 से 9 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच हर घंटे होगी।
  • बाकी समय में हर दो घंटे पर सफाई अनिवार्य होगी। इससे ट्रेनों में गंदगी और बदबू जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

स्टाफ के लिए नई शर्तें, लापरवाही पर कड़ी सजा

अब कोच अटेंडेंट और सुपरवाइजर बनने के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास और ITI अनिवार्य कर दी गई है। स्टाफ को सफाई के साथ-साथ प्राथमिक चिकित्सा और छोटे रिपेयरिंग कार्यों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यदि किसी कर्मचारी द्वारा दुर्व्यवहार या लापरवाही की शिकायत मिलती है, तो संबंधित एजेंसी पर भारी जुर्माना लगेगा और जरूरत पड़ने पर उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकेगा।

 यात्रियों की रेटिंग बनेगी कंपनी का रिपोर्ट कार्ड

यात्रियों से स्टार-रेटिंग फीडबैक सिस्टम के जरिए सीधे फीडबैक लिया जाएगा। इसी के आधार पर सर्विस देने वाली एजेंसी का प्रदर्शन रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। यानी अब यात्री सिर्फ सफर नहीं करेंगे, बल्कि सिस्टम के मूल्यांकनकर्ता भी होंगे।

रेलवे का दावा: सुविधाएं होंगी विश्वस्तरीय

उत्तर-मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, यह नीति ट्रेनों में साफ-सफाई और सेवाओं के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम है। AI तकनीक, जवाबदेही, सख्त नियम और यात्रियों की भागीदारी – इन सबका मकसद एक ही है: भारतीय रेल यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और विश्वस्तरीय बनाना।
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