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November 29, 2025

क्या आप जानते उस गांव को, जिसकी वजह से भारत ने पाकिस्तान को12 गांव दे दिए? आखिर क्या खास था इसमें?

The CSR Journal Magazine
हुसैनीवाला, पंजाब का एक छोटा सा गांव, इतिहास में अपनी गहरी पहचान रखता है और इसे अक्सर “शहीदों का देश” कहा जाता है। यह गांव केवल भौगोलिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और देशभक्ति की भावना का प्रतीक भी है। यहां की मिट्टी पर उन वीरों की गाथाएं गूंजती हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता की खातिर अपने प्राणों की आहुति दी।

इतिहास और महत्व

23 मार्च 1931 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया। इसी दिन अंग्रेजों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी। इन महान स्वतंत्रता सेनानियों का अंतिम संस्कार कथित तौर पर हुसैनीवाला के पास सतलज नदी के किनारे किया गया। उस समय से यह स्थान देशभक्तों के लिए एक पवित्र स्थल बन गया।
बंटवारे के समय, 1947 में, हुसैनीवाला पाकिस्तान के हिस्से में चला गया था। लेकिन भारतीय जनता और शहीदों की स्मृति को ध्यान में रखते हुए, 17 जनवरी 1961 को भारत-पाक समझौते के तहत यह गांव भारत को वापस मिला। इसके बदले भारत ने पाकिस्तान को 12 अन्य गांव सौंपे। यह अदला-बदली केवल भौगोलिक नहीं थी; यह भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व की थी। वह भूमि, जहां स्वतंत्रता सेनानियों की बलिदान गाथा बसी थी, देश के पास ही सुरक्षित रखी गई।

स्मारक और समारोह

आज हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक (Hussainiwala National Martyrs Memorial) खड़ा है। यह स्मारक हर साल 23 मार्च को विशेष श्रद्धांजलि और समारोह का केंद्र बनता है। इस अवसर पर देशभर से लोग यहां आते हैं और उन वीरों को याद करते हैं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। स्मारक की शांत और गरिमामय उपस्थिति लोगों में देशभक्ति की भावना को जागृत करती है।
इसके अलावा, हुसैनीवाला में रोजाना भारतीय और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच झंडा-अवतरण समारोह होता है। यह आयोजन न केवल सीमा सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि शहादत और सम्मान की भावना को भी जीवित रखता है। यह समारोह भावनात्मक और प्रतीकात्मक दृष्टि से दर्शकों के दिलों को छू जाता है।

क्यों “शहीदों का देश” कहा जाता है

हुसैनीवाला सिर्फ एक गांव नहीं है; यह शहीदों की स्मृति और बलिदान की गाथा का प्रतीक है। यहां की मिट्टी में आज़ादी की भावना बसी है और यह देशभक्तों के लिए श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बना हुआ है। भारत ने 12 गांव देकर इस एक गांव को चुना ताकि इतिहास की इस पवित्र धरोहर को संरक्षित किया जा सके।
आज भी हुसैनीवाला हर भारतीय के लिए एक ऐसा स्थल है, जहां वे शहीदों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और अपने देश के लिए उनके बलिदान को याद करते हैं। यह गांव स्वतंत्रता संग्राम की गौरव गाथा का जीवित प्रमाण है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
हुसैनीवाला यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं है, बल्कि उन वीरों की शहादत का परिणाम है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस भूमि को आज़ाद कराया। यह जगह हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की ज्वाला को जलाए रखती है और शहीदों के सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखती है।
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