पंजाब में पानी की बड़ी क्रांति: 6700 करोड़ खर्च, हर खेत तक पहुंचा पानी, किसानों की बदली किस्मत

The CSR Journal Magazine
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब में पिछले चार सालों में सिंचाई के क्षेत्र में किए गए विशाल कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने अप्रैल 2022 से अब तक नहरों की लाइनिंग, मरम्मत और आधुनिककरण में 6,700 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह राशि पहले किसी भी सरकार द्वारा खर्च की गई सबसे अधिक राशि है।

सिंचाई प्रणाली में सुधार

CM मान ने बताया कि आम आदमी पार्टी के शासन में केवल चार साल में ही मौसमी नदियों से 10,000 क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने दावा किया कि अब पंजाब के खेतों को भाखड़ा नहर के बराबर पानी मिल रहा है, जो किसानों की स्थिति में सुधार लाने में मददगार साबित होगा।

नहरों का ऐतिहासिक पुनर्जीवितकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में नहरी सिंचाई केवल 26.50 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 78 प्रतिशत हो गई है। 22 किलोमीटर लंबी सरहाली नहर का पुनर्जीवितकरण एक बड़ा कदम है। अब तक 1,446 गांवों तक नहरी पानी पहुंचाया जा चुका है, जो एक नई उपलब्धि है।

रकबा बढ़ाने की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री मान ने यह भी बताया कि नहरी सिंचाई का रकबा लगभग 58 लाख एकड़ तक बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही, नहरों के निर्माण और मरम्मत के लिए 2,000 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इससे 7,000 खालों को भी बहाल किया गया है, जो किसानों को बहुत लाभ पहुंचाएगा।

बंद नहरों की पुनर्जीवित प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की 101 बंद पड़ी नहरें, जो कई दशकों से बंद थीं, को बिना किसी जमीन पर कब्जा लिए पुनर्जीवित किया गया है। इससे किसानों को अतिरिक्त पानी की आपूर्ति मिल रही है, जिससे कृषि के उत्पादन में संभावित वृद्धि हो सकती है।

जल आपूर्ति में वृद्धि

फिरोजपुर फीडर नहर को 35 दिनों में अपग्रेड किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, सरहिंद नहर, जो 1950 के आसपास बनी थी, उसकी क्षमता भी बढ़ाई गई है। इससे किसानों को नहरी जल की अधिक उपलब्धता मिली है।

किसानों की चुनौतियों का समाधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नहरों में पानी रोटेशनल आधार पर मिलता था, जिससे किसानों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। अब इस प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, जिससे सभी किसानों को नियमित रूप से पानी मिल रहा है।

भूजल संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने भूजल संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुरदासपुर के एक गांव में भूजल की निकासी 61.48 प्रतिशत से घटकर 31 प्रतिशत हो गई है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट को कम किया जा सकेगा। सतही जल का उपयोग बढ़ाने की दिशा में सरकार की यह कोशिश महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
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