Jantar Mantar पर प्रदर्शन करना पड़ेगा महंगा: जेल से जमानत तक का चक्कर, नए प्रतिबंधों से मचेगा हड़कंप

The CSR Journal Magazine
दिल्ली का जंतर मंतर अब पहले जैसा नहीं रहा। यहां पर प्रदर्शन करने वालों के लिए नई कानूनी चुनौतियाँ सामने आई हैं। हाल ही में, जंतर मंतर को निषेधाज्ञा के दायरे में लाने के बाद, अब यहां पर कोई भी धरना, नारेबाजी या पुतला दहन करने की अनुमति नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई भी व्यक्ति यहां प्रदर्शन करने की कोशिश करता है, तो उसे गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

कानूनी कार्रवाई की सख्त धाराएँ

जंतर मंतर पर बिना अनुमति के भीड़ इकट्ठा करने पर हिरासत और जुर्माना के साथ-साथ 6 महीने से लेकर 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत सरकारी आदेश की अवहेलना करने पर भी मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा, CrPC की धारा 144 और BNSS की धारा 163 के उल्लंघन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस अक्सर जंतर मंतर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा लागू करती है। इस कानून के तहत, एक जगह पर 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी होती है। अगर कोई भीड़ पुलिस के आदेश का पालन नहीं करती, तो उन्हें बलपूर्वक हटाया जा सकता है।

गैरकानूनी सभा के गंभीर परिणाम

गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने पर अगर प्रदर्शन हिंसक हो जाता है, तो इसे ‘गैरकानूनी सभा’ घोषित किया जा सकता है। BNS की धारा 189 और IPC की धारा 143 के अनुसार, ऐसे मामलों में 6 महीने तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। अगर प्रदर्शनकारी घातक हथियारों के साथ पाए जाते हैं, तो सजा 2 साल तक की भी हो सकती है।

पुलिस पर हमला: गंभीर अपराध

यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमला किया जाता है या बल प्रयोग किया जाता है, तो यह गैर-जमानती अपराध बन जाता है। ऐसे मामलों में 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, अगर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जाता है, तो PDPP Act के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
बिना अनुमति प्रदर्शन करने वालों को पुलिस पहले किसी अन्य स्थान पर ले जाकर छोड़ देती है। अगर मामला गंभीर होता है, तो आयोजकों और मुख्य चेहरों के खिलाफ FIR दर्ज की जाती है। इससे भविष्य में उस संगठन को दिल्ली में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति मिलने में भारी मुश्किलें आ सकती हैं।

प्रदर्शन की अनुमति के लिए नए नियम

अब जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए पहले से अधिक सख्त नियम लागू हो चुके हैं। अगर कोई संस्था या समूह बिना पुलिस प्रशासन की लिखित अनुमति के प्रदर्शन करता है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह स्थिति उन लोगों के लिए एक चेतावनी है, जो बिना अनुमति के प्रदर्शन करने की सोच रहे हैं।
अगर प्रदर्शन के दौरान किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जाता है, तो सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इसमें 5 साल तक की जेल का कड़ा प्रावधान है। इसके अलावा, नुकसान की भरपाई भी संबंधित आयोजक संगठन या प्रदर्शनकारियों से वसूली जा सकती है।

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