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February 12, 2026

प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में शिफ्ट होगा, अंतिम कैबिनेट बैठक 13 फरवरी को होगी

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब साउथ ब्लॉक से अपनी ऐतिहासिक विदाई ले रहा है। 13 फरवरी को होने वाली अंतिम कैबिनेट बैठक कई मायनों में खास होगी। साउथ ब्लॉक, जो पिछले 80 वर्षों से भारतीय राजनीति का केंद्र रहा है, का सम्मानजनक विदाई देने के लिए यह बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक का समय शाम चार बजे है, जो साउथ ब्लॉक में स्थित PMO में होगी। इसके बाद, प्रधानमंत्री कार्यालय नया और आधुनिक ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में शिफ्ट हो जाएगा।

80 वर्षों का राजनीतिक इतिहास

जानकारी के अनुसार, साउथ ब्लॉक में पहली कैबिनेट बैठक 15 अगस्त 1947 को हुई थी, जिसका संचालन पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। अब, 13 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहाँ अंतिम कैबिनेट बैठक होगी। यह पल भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ होगा, जिससे साउथ ब्लॉक के महत्व को समझा जा सकेगा। इस इमारत ने भारत की राजनीतिक यात्रा के विभिन्न चरणों को देखा है।

नया प्रधानमंत्री कार्यालय: सेवा तीर्थ

विजय चौक के पास नया प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ बनकर तैयार है। यह परिसर आधुनिक सुविधाओं से युक्त है और यह करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है। इस निर्माण पर लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसमें तीन मुख्य इमारतें शामिल हैं: सेवा तीर्थ-1 (PMO मुख्यालय), सेवा तीर्थ-2 (कैबिनेट सचिवालय) और सेवा तीर्थ-3 (NSA एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय)।

नए स्थान पर पीएम का आगमन

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने अपने नए कार्यालय में शिफ्ट हो सकते हैं। आमतौर पर, कैबिनेट बैठकों का आयोजन प्रधानमंत्री निवास, सात लोक कल्याण मार्ग पर किया जाता है, जहाँ कैबिनेट बैठकों के लिए एक अलग कक्ष बनाया गया है। लेकिन सेवा तीर्थ में अब कैबिनेट मीटिंग के लिए एक विशेष हॉल तैयार किया गया है, जिससे बैठकें और भी सुगम हो सकेंगी।

सार्वजनिक उपयोग के लिए संग्रहालय की योजना

खाली होने वाले साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को सार्वजनिक उपयोग के लिए संग्रहालयों में तब्दील करने की योजना बनाई जा रही है। नॉर्थ ब्लॉक में संग्रहालय का निर्माण पहले ही शुरू किया जा चुका है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भारत की प्रशासनिक विरासत को करीब से देख सकें। यह इमारतें भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और इनके संरक्षण से युवा पीढ़ी को बेहतर रूप से इसकी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

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