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January 29, 2026

कोरिया की राजनीति में भूचाल पूर्व प्रथम महिला किम केओन-ही को 20 महीने की जेल, पति यून सुक-योल पहले से कैद

The CSR Journal Magazine
दक्षिण कोरिया के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी देश की प्रथम महिला और उनके राष्ट्रपति पति दोनों जेल में हैं। पूर्व प्रथम महिला किम केओन-ही को भ्रष्टाचार के एक मामले में 20 महीने की सजा सुनाई गई है, जबकि उनके पति और अपदस्थ राष्ट्रपति यून सुक-योल पहले से ही कारावास भुगत रहे हैं। यह फैसला दक्षिण कोरिया की सख्त भ्रष्टाचार-विरोधी नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

कौन हैं किम केओन-ही? विवादों में रही पूर्व प्रथम महिला

52 वर्षीय किम केओन-ही एक पूर्व व्यवसायी और अकादमिक रही हैं, जो यून सुक-योल से विवाह के बाद राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बनीं। राष्ट्रपति की पत्नी होने के बावजूद उनका कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं था, लेकिन आलोचकों का आरोप रहा कि उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर खासा प्रभाव बनाया। यून सुक-योल के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान किम पर नैतिकता से जुड़े कई सवाल उठे और उन पर “अनौपचारिक सत्ता” के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे। यही वजह है कि वे लगातार मीडिया और विपक्ष के निशाने पर बनी रहीं।

रिश्वत का मामला हीरे का हार और लग्ज़री बैग

सियोल की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किम केओन-ही ने अप्रैल से जुलाई 2022 के बीच यूनिफिकेशन चर्च से लगभग करीब 8 करोड़ रुपये की रिश्वत स्वीकार की। इस रिश्वत में ग्रैफ कंपनी का महंगा हीरे का हार और शनेल के लग्ज़री हैंडबैग शामिल थे। अदालत के अनुसार, ये उपहार राजनीतिक और कारोबारी फायदे के बदले दिए गए थे। हालांकि किम ने सीधे तौर पर रिश्वत की मांग नहीं की, लेकिन न्यायालय ने माना कि उन्होंने अपने प्रभावशाली पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया।

किन आरोपों में राहत, किन में सजा

अदालत ने किम केओन-ही को रिश्वत के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 महीने की जेल की सजा सुनाई। हालांकि उन्हें शेयर बाजार में हेरफेर और 2022 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले मुफ्त जनमत सर्वे हासिल करने के आरोपों से बरी कर दिया गया। जज ने कहा कि इन मामलों में उनके सीधे तौर पर शामिल होने के पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए जा सके। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि किम का आपराधिक रिकॉर्ड सीमित था, लेकिन रिश्वत का आरोप गंभीर होने के कारण सजा देना जरूरी था।

डिग्री रद्द, सख्त संदेश और राजनीतिक असर

भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद किम को अकादमिक और नैतिक स्तर पर भी झटका लगा। साल 2025 में सुकम्युंग वुमेंस यूनिवर्सिटी ने साहित्यिक चोरी के आरोपों के चलते उनकी मास्टर डिग्री रद्द कर दी। इसके अलावा, यूनिफिकेशन चर्च से जुड़े राजनीतिक भर्ती नेटवर्क में उनकी कथित भूमिका को लेकर भी उनसे पूछताछ हुई। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला दक्षिण कोरिया में सत्ता के उच्चतम स्तर पर भी कानून के सख्त पालन का संदेश देता है।
किम केओन-ही की सजा और यून सुक-योल की कैद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिण कोरिया में कानून से ऊपर कोई नहीं है—चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हो। यह फैसला न केवल राजनीतिक इतिहास में मिसाल बनेगा, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वैश्विक बहस में भी अहम संदर्भ के रूप में देखा जाएगा।

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