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March 6, 2026

PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बात: मिडिल ईस्ट के संकट पर चर्चा

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिडिल ईस्ट में बढ़ते हालात पर बातचीत की है। उन्होंने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर चिंता व्यक्त की। यह बातचीत तब हुई जब श्रीलंकाई तट के पास ईरानी नौसेना पोत पर हमले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। दोनों नेताओं ने शांति और स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति पर लौटने पर जोर दिया।

भारत-फ्रांस का बढ़ता सहयोग

पीएम मोदी ने एक टेलीफोन कॉल में भारत और फ्रांस की साझा चिंताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर मिडिल ईस्ट में शांति के लिए काम करते रहेंगे। मोदी ने अपने उत्साही ट्वीट में लिखा, “हम पश्चिम एशिया में बदलते हालात की चर्चा की और बातचीत और कूटनीति पर लौटने की आवश्यकता पर सहमति जताई।” इस बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

विभिन्न राष्ट्रों से संपर्क

गुरुवार को राष्ट्रपति मैक्रों से बात करने से पहले, पीएम मोदी ने युद्ध की शुरुआत के बाद से मिडिल ईस्ट के आठ अन्य नेताओं से भी बातचीत की। यह फोन कॉल अमेरिका द्वारा श्रीलंका के तट पर एक ईरानी नेवी वेसल को डुबोने के बाद हुई, जिसमें कई नाविकों की जान गई। इस घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई।

हमलों के बीच चल रहा तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। दोनों पक्षों के बीच फायरिंग और जवाबी हमलों ने मौजूदा स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमला

अमेरिका द्वारा 4 मार्च को श्रीलंका के तट पर ईरानी जहाज पर किए गए टॉरपीडो हमले ने तनाव को और बढ़ाकर एक नई दहशत पैदा कर दी। श्रीलंका की नेवी ने कहा कि उन्हें डिस्ट्रेस सिग्नल प्राप्त हुआ था। इस घटना ने इराक में रह रहे ईरानी नागरिकों के बीच एक चिंता का माहौल बना दिया है, क्योंकि यह स्थिति अब पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुकी है।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी इस कार्रवाई के लिए पछतावा होगा। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई बिना किसी चेतावनी के की गई और यह कि अमेरिका को इसके दुष्परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

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