लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील, जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स और अनिल अंबानी से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर लगाए गए आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। पुरी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सफाई दी, जबकि कांग्रेस ने छह सवाल उठाए। सत्ता पक्ष ने राहुल के आरोपों को निराधार बताया।

बजट चर्चा में राहुल गांधी का तीखा हमला

बुधवार को लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने “पूरी तरह आत्मसमर्पण” कर दिया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि टैरिफ़ नीति, डेटा लोकलाइजेशन और डिजिटल व्यापार नियमों के मुद्दे पर भारत ने अपने हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों का भविष्य भाजपा के वित्तीय ढांचे की रक्षा के लिए दांव पर लगा दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का डेटा अमेरिका को सौंपा जा रहा है और देश की सबसे कीमती संपत्ति पर नियंत्रण छोड़ा जा रहा है। उनके बयान के बाद सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।

एपस्टीन फ़ाइल्स और हरदीप पुरी पर आरोप

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी का नाम एपस्टीन फ़ाइल्स में है और पूछा कि वे जेल में क्यों नहीं हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हरदीप पुरी ने ही अनिल अंबानी का परिचय अमेरिकी निवेशक और यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से कराया था। राहुल ने कहा, “मैं हरदीप पुरी से पूछना चाहूंगा, जिन्होंने उन्हें एपस्टीन से परिचय कराया था। मैं जानता हूं कि किसने परिचय कराया और हरदीप पुरी भी जानते हैं।” इस बयान से सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।

हरदीप पुरी की सफाई ‘तीन-चार बार ही मुलाक़ात’

राहुल गांधी के आरोपों के बाद हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाक़ात केवल “कुछ मौकों पर, वह भी एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर” हुई थी। पुरी ने बताया कि वे 2009 से 2017 तक न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे और संयुक्त राष्ट्र में राजदूत के तौर पर कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) और ICM से जुड़े। उन्होंने कहा कि IPI और ICM के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में वे एपस्टीन से अधिकतम तीन या चार बार मिले। पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि एपस्टीन इन संस्थाओं का औपचारिक हिस्सा नहीं था। उनका कहना था कि एपस्टीन से जुड़े आपराधिक मामलों से उनका कोई संबंध नहीं है और जो भी ईमेल आदान-प्रदान हुआ, वह सार्वजनिक है।

कांग्रेस के छह सवाल और ईमेल विवाद

पुरी की सफाई के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर छह सवाल उठाए। खेड़ा ने 4 अक्टूबर 2014 के एक कथित ईमेल का ज़िक्र किया, जिसमें एपस्टीन ने पुरी से रीड हॉफमैन के साथ मुलाकात के बारे में पूछा था। खेड़ा के छह सवालों में पूछा गया कि एपस्टीन को पहले से मुलाकात की जानकारी कैसे थी, क्या वही संपर्क सूत्र था, पुरी ने उसे ‘दोस्त’ क्यों कहा, और अगर संबंध सतही था तो सलाह क्यों मांगी गई। कांग्रेस का कहना है कि ये सवाल गंभीर हैं और पारदर्शिता के लिए इनका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।

रिजिजू और बीजेपी का पलटवार

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को “निराधार” बताया। उन्होंने कहा कि बिना सबूत और बिना नोटिस ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और राहुल के भाषण की “ग़लत बातों” को कार्यवाही से हटाया जाएगा। रिजिजू ने कहा, “भारत को कोई बेच या खरीद नहीं सकता। ऐसे बयान देश की गरिमा के खिलाफ हैं।”
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद की मर्यादा का पालन नहीं किया गया और विपक्ष “सड़क छाप आचरण” कर रहा है। त्रिवेदी ने कहा कि संसद लोकतंत्र के सर्वोच्च मानकों का प्रतीक है और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से उसकी गरिमा को ठेस पहुंचती है।

नरवणे विवाद की पृष्ठभूमि में बढ़ा तनाव

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर चल रहा विवाद भी है। पिछले सप्ताह राहुल गांधी ने इसके कुछ अंश उद्धृत करने की कोशिश की थी, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आपत्ति जताई थी। विपक्ष का आरोप था कि राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्ता पक्ष का कहना था कि अप्रकाशित अंश उद्धृत करना नियमों के विरुद्ध है।
इन घटनाओं के बीच बजट चर्चा में दिए गए राहुल गांधी के भाषण ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया। अब मामला संसद से निकलकर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हैं, जबकि एपस्टीन फ़ाइल्स से जुड़े दस्तावेजों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा जारी है।

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