पाकिस्तान में आंतरिक हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में पाक वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में हवाई हमला किया, जिसमें 30 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हो गई। इस घटना ने देश के भीतर गहरे असंतोष और सैन्य दमन की तस्वीर को उजागर कर दिया है। हमले पर अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पूर्व अफगान उपराष्ट्रपति की चेतावनी
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ऐसा हमला पंजाब में होता, तो पूरे देश में भूचाल आ जाता, लेकिन चूंकि यह हमला पूर्व FATA जैसे क्षेत्र में हुआ है, जहां के लोगों को हमेशा से बलि का बकरा बनाया जाता है, इसलिए इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। सालेह ने कहा कि पाकिस्तान के टुकड़े होने की शुरुआत हो चुकी है, और यह हमला उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मुख्यधारा की पाकिस्तानी मीडिया ने इस हमले को ठीक से कवर भी किया या नहीं।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के तिराह घाटी में सोमवार, 22 सितंबर 2025 की रात लगभग 2 बजे पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए हवाई हमले में कम से कम 30 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई। इनमें अधिकांश महिलाएं और छोटे बच्चे शामिल थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना के JF-17 लड़ाकू विमानों ने मत्रे दारा गांव पर आठ LS-6 बम गिराए। ये बम चीनी निर्माण के थे और अत्यधिक विनाशकारी साबित हुए। हमले में कई लोग घायल हुए, जबकि घर और अन्य इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं।
हमला कैसे हुआ?
पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि तिराह घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के ठिकाने थे और यह हमला आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए किया गया। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि हमले का निशाना पूरी तरह निर्दोष नागरिक थे और यह हमला “गलती” या लापरवाही का परिणाम था। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर JF-17 लड़ाकू विमानों ने अचानक बमबारी शुरू की। बमों के विस्फोट और तेज आवाज़ ने गांव में भय और आतंक का माहौल पैदा कर दिया।
घटना के बाद का दृश्य
हमले के बाद गांव का नजारा बेहद दर्दनाक था। मकान ढह गए, सड़कें खून और मलबे से लाल हो गईं। लोग चीख-पुकार करते हुए अपने परिवार और बच्चों को बचाने में जुटे रहे। घायल लोगों को गंभीर चोटों के साथ अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में लाया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हमला अचानक और निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया गया। महिलाओं और बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को शोक और आक्रोश में डुबो दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया और लोगों का गुस्सा
घटना के बाद स्थानीय लोग सोशल मीडिया पर मारे गए बच्चों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं और पाकिस्तानी सेना से सवाल कर रहे हैं: “क्या ये बच्चे आतंकवादी थे?” स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हमला निर्दोष नागरिकों के खिलाफ जानबूझकर किया गया और पाकिस्तान सेना को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने हमले को ‘गलती’ मानते हुए मृतक परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने हर मृतक परिवार को 10 लाख पाकिस्तानी रुपये देने की घोषणा की।
हालांकि, स्थानीय लोग इस मुआवजे को अपर्याप्त मानते हुए सेना और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार और सेना ने इसे गलती मानते हुए मुआवजे की घोषणा की, लेकिन कोई आधिकारिक बयान यह स्पष्ट नहीं करता कि यह हमला पूरी तरह से सटीक टारगेटिंग के कारण हुआ या जमीनी गड़बड़ी के कारण। मानवाधिकार कार्यकर्ता जहनवाज वेशा ने ट्वीट किया, “क्या इन मासूम बच्चों के कोई अधिकार नहीं हैं? दुनिया क्यों चुप है?”
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