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March 10, 2026

तेल संकट के बीच पाकिस्तान में सख्ती: 4 दिन दफ्तर, मंत्री बिना वेतन, इफ्तार पार्टियों और विदेश यात्राओं पर रोक

The CSR Journal Magazine
पाकिस्तान इन दिनों गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और युद्ध की वजह से वैश्विक ईंधन बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। सरकार ने हालात को संभालने के लिए कई सख्त फैसले लागू करने का ऐलान किया है।

हफ्ते में 4 दिन खुलेंगे सरकारी दफ्तर

ऊर्जा की बचत के लिए सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी दफ्तर हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे। इसके साथ ही आधे कर्मचारी वर्क-फ्रॉम-होम के तहत काम करेंगे ताकि बिजली और ईंधन की खपत कम हो सके। हालांकि यह नियम बैंकों पर लागू नहीं होगा। सरकार ने एहतियात के तौर पर दो हफ्तों के लिए स्कूल भी बंद करने का फैसला लिया है।

सरकारी वाहनों के ईंधन में भारी कटौती

प्रधानमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है। पाकिस्तान खाड़ी देशों से आने वाली तेल और गैस आपूर्ति पर काफी निर्भर है। ऐसे में ऊर्जा बचाने के लिए सरकारी विभागों के वाहनों के ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी। साथ ही 60 प्रतिशत सरकारी वाहन अगले दो महीनों तक सड़कों पर नहीं उतरेंगे।

मंत्री नहीं लेंगे वेतन, सांसदों की सैलरी कटेगी

सरकार ने खर्च कम करने के लिए राजनीतिक नेतृत्व पर भी सख्ती लागू की है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि मंत्री, सलाहकार और विशेष सहायक अगले दो महीनों तक वेतन नहीं लेंगे। वहीं सांसदों के वेतन में इसी अवधि के दौरान 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम आर्थिक दबाव कम करने के लिए जरूरी है।

इफ्तार पार्टियों और विदेश यात्राओं पर रोक

खर्चों में कटौती के तहत सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। आधिकारिक डिनर और इफ्तार पार्टियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा जरूरी मामलों को छोड़कर मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने निर्देश दिया है कि सेमिनार और आधिकारिक कार्यक्रम केवल सरकारी परिसरों में ही आयोजित किए जाएं।
सरकार का कहना है कि ये सभी फैसले अस्थायी हैं, लेकिन मौजूदा ऊर्जा संकट से निपटने के लिए जरूरी कदम हैं।
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