न्यूक्लियर क्षमता का हवाला देकर पाकिस्तान की चेतावनी

The CSR Journal Magazine
पाकिस्तान के पूर्व हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने हाल ही में एक बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने अमेरिका के हमले की स्थिति में भारत पर हमला करने की धमकी दी है। इस बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर चिंतित हो सकता है, और अगर ऐसा हुआ, तो हमें भारत पर हमला करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

गंभीर सुरक्षा चिंताएँ

बासित ने ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रही जंग की चर्चा करते हुए कहा कि अमेरिका हमारी न्यूक्लियर कैपिसिटी को तबाह करने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल हमारी रेंज में नहीं आते, लेकिन अगर अमेरिकी हमले की स्थिति बनती है, तो हमें बिना किसी सोच-विचार के भारत पर हमला करना चाहिए। यह बयान न केवल पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति को दिखाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है।

क्या बासित का डर वाजिब है?

अब सवाल यह उठता है कि बासित को अमेरिका के हमले का डर क्यों सता रहा है। इस दौरान, अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने पाकिस्तान को खतरा करार दिया है। अमेरिका की खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा है कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है। उनके अनुसार, पाकिस्तान तेजी से एडवांस मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर काम कर रहा है, जो इस देश के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

पाकिस्तान की खामोशियाँ

हालांकि बासित के बयान पर गौर करते हुए यह भी ध्यान देने योग्य है कि पाकिस्तान पिछले कुछ दशकों में कई जंगें हार चुका है। 1965, 1971 और 1999 का कारगिल युद्ध इसका जीवंत उदाहरण है। इन सभी जंगों में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी, और दुनिया ने देखा है कि कैसे 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया।

बासित की ख्याली दुनिया

अब्दुल बासित का यह बयान उनकी ख्याली दुनिया को दर्शाता है, जहां वो यह सोचते हैं कि अमेरिका के किसी भी हमले का जवाब भारत पर देना सही होगा। यह दर्शाता है कि उन्होंने शायद अपने देश की वास्तविकता को भुला दिया है। पाकिस्तान की यह आदत रही है कि वह हमेशा दूसरों को धमकाने की कोशिश करता है, जबकि उसके अपने देश की स्थिति कमजोर होती जा रही है।

पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि

बासित की धमकियाँ इस समय जब आई हैं, जब पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि काफी खराब हो चुकी है। पाकिस्तान दुनिया से कर्ज मांगता है और फिर भी वह आए दिन ऐसी गीदड़भभकी देता है। यह सच्चाई है कि पाकिस्तान के नेताओं को अपने देश के हालात से ज्यादा अपनी ख्याली दुनिया में रहने में सुकून मिलता है। बासित का बयान इसी मानसिकता का एक हिस्सा है।

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