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January 13, 2026

300% घाटे में फंसी सरकारी कंपनियां, Pakistan की जनता कर रही कंगाली का सामना

The CSR Journal Magazine
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है, और इसके सबसे बड़े कारणों में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों का बढ़ता घाटा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों का शुद्ध घाटा पिछले साल की तुलना में 300 प्रतिशत तक बढ़ गया है। सरकारी मदद में भी लगातार इजाफा हो रहा है और अब यह 2.1 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच चुका है। इससे साफ है कि करदाताओं के पैसे का बड़ा हिस्सा इन घाटे में डूब रहा है, जबकि आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

राजस्व में भारी गिरावट, घाटा लगातार बढ़ता जा रहा

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025 की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है। सरकारी कंपनियों का कुल राजस्व 1.4 ट्रिलियन रुपये घटकर 12.4 ट्रिलियन रुपये रह गया है। वहीं, इन कंपनियों का कुल शुद्ध घाटा 30.6 अरब रुपये से बढ़कर 122.9 अरब रुपये हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकेत है कि सरकारी संस्थाओं का परिचालन और संरचना गंभीर रूप से असफल हो रही है, और यह लगातार सार्वजनिक संसाधनों को निगल रही है।

नेशनल हाईवे अथॉरिटी और बिजली कंपनियां सबसे बड़ी समस्या

विशेष रूप से नेशनल हाईवे अथॉरिटी और बिजली वितरण कंपनियां घाटे के सबसे बड़े कारण बन रही हैं। लंबे समय से इन संस्थाओं में संरचनात्मक खामियां और परिचालन अक्षमताएं देखी जा रही हैं, लेकिन इन पर ठोस सुधार के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के लिए भी खतरा बन गया है।

केवल कागजी विकास पर ध्यान

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार कुछ ऐसे क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है, जो केवल कागजी तौर पर जीडीपी में वृद्धि दिखाते हैं। उदाहरण के तौर पर रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश से केवल संपत्ति बढ़ती है, जबकि वास्तविक व्यावसायिक निवेश और रोजगार सृजन पर इसका कोई खास असर नहीं होता। इस तरह की नीतियों से अर्थव्यवस्था की नींव कमजोर हो रही है।

गरीब और अमीर के बीच बढ़ती खाई

पाकिस्तान में सामाजिक असमानता भी गंभीर रूप ले रही है। 2019 के बाद से सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों की वास्तविक मासिक आय में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि अमीर वर्ग की आय में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बाहर औसत वेतन घटा और गरीबी तेजी से बढ़ी, जिससे आर्थिक असंतुलन और गहरा गया।

आम लोगों की बचत लगभग समाप्त

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आम लोगों की बचत लगभग खत्म हो चुकी है। परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अपनी जमा पूंजी खर्च करने को मजबूर हैं, जिससे बचत में 66 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च में भी करीब 19 प्रतिशत की कमी आई है। इसका मतलब है कि सामान्य परिवारों का जीवन स्तर लगातार गिर रहा है।

भविष्य की चिंताजनक तस्वीर

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ने जल्द ही संरचनात्मक सुधार और ठोस आर्थिक फैसले नहीं लिए, तो देश की आर्थिक स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। सरकारी कंपनियों का बढ़ता घाटा, असमानता और आम जनता की घटती बचत मिलकर देश की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।
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