केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में नए नियम जारी किए हैं, जिनमें सभी सरकारी आयोजनों और स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन, गण, मन’ से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार इस कदम को राष्ट्रीय सम्मान बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, लेकिन एआईएमआईएम ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी के नेता डॉ शोएब जमाई ने इसे ‘जबरन थोपा गया प्रोपेगेंडा’ करार दिया है।
ओवैसी की पार्टी का कड़ा बयान
डॉ शोएब जमाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया है कि ‘वंदे मातरम्’ ना तो राष्ट्रीयगान है और ना ही संविधान का हिस्सा। उन्होंने कहा कि लोग अपनी आस्था के अनुसार इसे गाते थे, लेकिन भाजपा और RSS इसे थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी गर्दन पर छुरी भी रखी जाए, तो भी वे इसे नहीं गाएंगे।
सरकार के निर्देश क्या हैं?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि जब किसी समारोह में ‘जन, गण, मन’ बजाया जाएगा, तब ‘वंदे मातरम्’ उसे पहले बजाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह गीत राष्ट्रपति के आगमन या विदाई के समय, औपचारिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक स्थानों पर भी बजाया जाएगा।
स्कूलों में लागू करने की योजना
नए नियमों के तहत, सभी स्कूलों में भी ‘वंदे मातरम्’ को गाना अनिवार्य होगा। मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि इस गीत को स्कूल के कार्यक्रमों में शामिल किया जाए, ताकि छात्रों में राष्ट्रीय ध्वज और गीत के प्रति सम्मान बढ़ सके।
क्या है एआईएमआईएम की चिंताएँ?
एआईएमआईएम के नेताओं का कहना है कि यह आदेश केवल एक राजनीति के तहत किया जा रहा है, जिसका मकसद धर्म विशेष के लोगों को लक्षित करना है। इनका मानना है कि यह आज़ादी के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार ने अपने आदेशों का बचाव करते हुए कहा है कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इसे सभी नागरिकों को स्वीकार करना चाहिए। मंत्रालय का कहना है कि यह आदेश केवल सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए है।
अगले कदम क्या होंगे?
जैसा कि बात बढ़ रही है, यह देखना होगा कि एआईएमआईएम और अन्य विरोधियों का क्या रुख रहेगा। सरकार की नीति के खिलाफ अव्यवस्थित प्रदर्शन भी हो सकते हैं। इस मामले में और बातों का खुलासा होना बाकी है।