Cuttack: Charred remains in a room after a major fire erupted in an ICU in the state government-run SCB Medical College and Hospital, in Cuttack, Odisha, Monday, March 16, 2026. At least ten patients were killed, 11 hospital staff members suffered burn injuries in the incident. (PTI Photo) (PTI03_16_2026_000011B)
कटक के श्रीराम चंद्र भंज (SCB) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग लगने की घटना ने 12 मरीजों की जिंदगी ले ली। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना के दो दिन बाद चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इन निलंबित अधिकारियों में अग्निशमन सेवा के तीन कर्मचारी और एक इलेक्ट्रिक विभाग का कर्मचारी शामिल हैं। घटना के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय में हड़कंप मच गया है और इसको लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है।
बीजद ने इसे दिखावा बताया
विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने इन निलंबनों को सिर्फ दिखावा करार दिया है। बीजद के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले में लापरवाही दिखाई है। उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण घटना के बाद सिर्फ चार जूनियर अधिकारियों का निलंबन उचित नहीं हैं।
आग लगने का कारण और शुरुआती जांच
SCB मेडिकल कॉलेज में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया। यह आग 14-15 मार्च की रात करीब 3 बजे लगी थी। आग लगने के समय दो मृतक मौके पर ही दम तोड़ चुके थे जबकि अन्य पांच मरीज़ इलाज के दौरान जान गवां बैठे। विकास आयुक्त डी.के. सिंह की अध्यक्षता वाली समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
कांग्रेस ने की निंदा
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस घटना को सुरक्षा में नाकामी का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि ICU में बार-बार ऐसी घटनाएं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। दास ने यह भी कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मौतों का आंकड़ा और अस्पताल की स्थिति
आग की घटना के कारण परिजनों में भारी गुस्सा है। अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम न होने का आरोप भी उठाया गया है। एक मृतक के भाई ने बताया कि आग या धुंए से बचने के लिए कोई अलार्म सुनाई नहीं दिया। इसके कारण मरीजों को बाहर निकाले जाने में कठिनाई हुई। घटना के समय फायर टेंडर को घटनास्थल पर पहुंचने में करीब 30 मिनट लग गए, जबकि फायर स्टेशन अस्पताल के परिसर के अंदर ही था।
चश्मदीदों का बयान
चश्मदीदों ने बताया कि, धुंए फैलने के साथ ही स्थिति काफी गंभीर हो गई। जिन मरीजों को पहले से सांस लेने में समस्या थी, उन्हें और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआती मिनटों में उन्हें समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
भविष्य में संभावित कार्रवाई
2016 में ओडिशा के भुवनेश्वर के SUM हॉस्पिटल में भी इसी तरह की आग लगने की घटना में 22 मरीजों की मौत हो गई थी। तब की स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। अब इस नए हादसे ने सवाल उठाया है कि इस बार जिम्मेदार कौन होगा और सरकार किस पर कार्रवाई करेगी।
अन्य अस्पतालों में सुरक्षा की कमी
हाल ही में जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में भी आग लगने से 8 मरीजों की मौत हुई थी। यह सब घटनाएं दर्शाती हैं कि अस्पतालों में फायर सुरक्षा के इंतजाम कितने जरूरी हैं। सुरक्षा की इन गंभीर खामियों को सामने लाने की आवश्यकता है।
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