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March 5, 2026

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने का नोटिस: सदन में रहेंगे मौजूद, बचाव का मिलेगा अधिकार

The CSR Journal Magazine
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू हो रहा है। इस दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। विपक्ष ने ओम बिरला पर आरोप लगाया है कि वे सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपाती व्यवहार कर रहे हैं। यह प्रस्ताव एक बड़े राजनीतिक विवाद का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य दल शामिल हैं। नोटिस पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिससे यह मामला और गरमा गया है।

कार्यवाही में ओम बिरला का क्या होगा रोल?

संविधान के नियमों के अनुसार, जब किसी अध्यक्ष के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव सदन में पेश होता है, तो वह अध्यक्षता नहीं कर सकते। ओम बिरला इस प्रक्रिया के दौरान सदन में सदस्य के रूप में उपस्थित रहेंगे। वह चर्चा में भाग ले सकेंगे और अपनी बात रखने का अधिकार भी होगा। हालांकि, मतदान करते समय उन्हें पर्ची का इस्तेमाल करना होगा।

संविधान के अनुच्छेद 96 की भूमिका

संविधान के अनुच्छेद 96 के मुताबिक, अध्यक्ष उस समय सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता जब उसके खिलाफ हटाने का प्रस्ताव चल रहा हो। इसके अलावा, अनुच्छेद 94 के अंतर्गत लोकसभा को साधारण बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा अध्यक्ष को हटाने का अधिकार है। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया और निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है।

संसद के इतिहास में पहली बार चर्चा

यह प्रस्ताव संसद के इतिहास में पहली बार प्रस्तुत किया जा रहा है। लोकसभा के नियमों के अनुसार, प्रस्ताव के लिए कम से कम दो सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। जबकि नोटिस पर कितने भी सदस्य हस्ताक्षर कर सकते हैं। ऐसे प्रस्ताव को सदन में लाने से पहले 14 दिन का नोटिस देना होता है और इसके बाद 10 दिनों के भीतर चर्चा का निपटारा किया जाना चाहिए।

क्या रहेगा विपक्ष का अगला कदम?

विपक्ष के नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि अगर उन्हें सदन में अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया, तो वे और भी कड़े कदम उठाने की योजना बना सकते हैं। इसके साथ ही इस कदम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिससे सदन में पारदर्शिता और निष्पक्षता का प्रवाह बना रहे।

बजट सत्र का महत्व

बजट सत्र आमतौर पर सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जबकि विपक्ष के पास अपने मुद्दों को उठाने का एक अच्छा मंच होता है। इस बार के सत्र में विपक्षी दलों के लिए यह सुनहरा मौका साबित हो सकता है, खासकर जब वे ओम बिरला के खिलाफ अपना प्रस्ताव लेकर आए हैं।

राजनीतिक बलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

यह घटना भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकती है, जब सदन के नियम और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आगामी दिन बेहद दिलचस्प रहने वाले हैं, जब सभी नजरें 9 मार्च को होने वाली कार्यवाही पर होंगी।

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