West Bengal Assembly Election 2026: अगर NOTA जीत जाए तो कौन बनेगा MLA? जानें चुनाव आयोग के नियम

The CSR Journal Magazine
भारत के चुनावों में NOTA (नन ऑफ द एबव) का विकल्प वोटरों को ‘राइट टू रिजेक्ट’ देता है. यह विकल्प वोटर्स को यह अनुकूलता प्रदान करता है कि वे सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार कर सकते हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं तो क्या होगा? वर्तमान कानूनी ढांचे के अनुसार, जीत उस उम्मीदवार को मिलेगी जिसने सबसे ज्यादा वैध वोट प्राप्त किए हैं, क्योंकि NOTA को कोई उम्मीदवार नहीं माना जाता है.

क्या होगा अगर NOTA जीत जाए?

यदि किसी चुनाव क्षेत्र में NOTA को अन्य सभी उम्मीदवारों से अधिक वोट मिलते हैं, तो इसका कानूनी मतलब क्या होगा? क्या उस इलाके में कोई MLA नहीं होगा? आम धारणा के विपरीत, NOTA की जीत का मतलब चुनाव का रद्द होना नहीं होता है. भारत की चुनावी प्रक्रिया के अनुसार, सबसे अधिक वैध वोट पाने वाला उम्मीदवार ही विजेता प्रतीत होगा. ऐसा क्यों है? क्योंकि NOTA कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि यह मात्र एक विकल्प है.

NOTA की शुरुआत और कानूनी स्थिति

NOTA का परिचय भारत में 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था. इसका उद्देश्य वोटर्स को अपनी असहमति व्यक्त करने का अवसर देना है ताकि राजनीतिक पार्टियां ईमानदार उम्मीदवारों को मैदान में उतारें. चुनाव आयोग के अधिनियम, 1951 के अनुसार, अगर NOTA को 1 लाख वोट मिलते हैं और दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार को 50,000 वोट, तो विजेता वही होगा जिसने 50,000 वोट प्राप्त किए.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि NOTA का वोट देना अपने विचार को व्यक्त करने का एक तरीका है, जैसा कि PUCL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया. इस मामले में, न्यायालय ने कहा था कि NOTA वोटर्स की भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम है. हालांकि, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता.

स्थानिय चुनावों में हालात बदल रहे हैं

हाल के समय में, कुछ राज्यों जैसे महाराष्ट्र और हरियाणा ने स्थानीय चुनावों में नए नियम लागू किए हैं. वहां, यदि NOTA अधिकतम वोट प्राप्त करता है, तो चुनाव दोबारा कराया जाता है. लेकिन, बंगाल के विधानसभा चुनाव में वर्तमान नियमों के अनुसार, NOTA की जीत का उम्मीदवार चयन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

क्या NOTA के नियम बदलेंगे?

अभी कई जगहों पर यह मांग उठाई जा रही है कि यदि NOTA चुनाव में जीतता है, तो उस सीट का चुनाव कैंसिल किया जाना चाहिए और मौजूदा उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए. पश्चिम बंगाल के मौजूदा कानूनी नियमों के अनुसार, अगर NOTA को प्रतीकात्मक रूप से जीतने की स्थिति मिलती है, तो भी यह चुनाव परिणामों को प्रभावित नहीं करेगा. यह राजनीतिक दलों के लिए एक चेतावनी है कि वोट देकर सोच-समझकर निर्णय लें.

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos