दक्षिणी स्विट्ज़रलैंड के क्रांस-मोंटाना स्की रिसॉर्ट में नए साल के जश्न के दौरान एक बार में लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचाई। हादसे में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि 115 लोग घायल हुए हैं। कई की हालत गंभीर बनी हुई है। जांच जारी है, हमले की आशंका खारिज की गई है।
कैसे हुआ हादसा और कहां लगी आग
नए साल की रात करीब डेढ़ बजे क्रांस-मोंटाना स्थित ‘ले कॉन्स्टेलेशन’ नामक बार में अचानक आग भड़क उठी। यह इलाका पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है और उस वक्त बार युवाओं और जश्न मनाने वाली भीड़ से भरा हुआ था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग तेजी से फैली और कुछ ही सेकंड में पूरे परिसर को चपेट में ले लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई आतंकी हमला नहीं था, बल्कि आग एक सामान्य घटना से भयावह रूप लेती चली गई।

राहत-बचाव और घायलों का इलाज
घटना के तुरंत बाद व्यापक राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। रातोंरात 13 हेलिकॉप्टर, 42 एंबुलेंस और 150 से अधिक आपातकर्मी मौके पर तैनात किए गए। वैले क्षेत्र के सियोन अस्पताल में 60 से अधिक घायलों को भर्ती किया गया, जहां आईसीयू पूरी तरह भर गई। गंभीर रूप से जले कई मरीजों को लॉज़ान, ज़्यूरिख और जेनेवा के विशेष बर्न यूनिट्स वाले अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश मरीजों की उम्र 15 से 25 वर्ष के बीच है और कई को जहरीला धुआं फेफड़ों में जाने से आंतरिक चोटें भी आई हैं।

आग इतनी घातक क्यों बनी ‘फ्लैशओवर’ का असर
अग्नि जांच विशेषज्ञों के अनुसार इस हादसे में ‘फ्लैशओवर इफेक्ट’ की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसमें आग लगने के बाद लपटें और गर्मी छत तक पहुंचकर तेजी से पूरे कमरे में फैल जाती हैं। अत्यधिक तापमान के कारण फर्नीचर और अन्य सामग्री ज्वलनशील गैसें छोड़ने लगती हैं, जो कुछ ही क्षणों में भड़क उठती हैं। नतीजतन, सेकंडों में पूरा कमरा आग की गिरफ्त में आ जाता है, जिससे बाहर निकलने का समय नहीं मिल पाता।


