राजस्थान की चर्चित साध्वी प्रेम बाईसा की जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने सनसनी फैला दी है। सांस की तकलीफ, आश्रम में लगाया गया इंजेक्शन, अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत, चार घंटे बाद सोशल मीडिया पोस्ट और पोस्टमार्टम से इनकार जैसे कई पहलुओं ने इस मामले को और रहस्यमय बना दिया है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, वहीं फॉलोअर्स और समर्थक मौत को सामान्य मानने से इनकार कर रहे हैं।
आश्रम में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
बुधवार सुबह जोधपुर के पाल गांव स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद आश्रम में ही नर्सिंग स्टाफ को बुलाया गया, जहां उन्हें एक इंजेक्शन दिया गया। परिजनों और आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, इंजेक्शन के बाद कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन करीब एक घंटे के भीतर हालत फिर बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, जब साध्वी को लाया गया, तब शरीर में कोई हलचल नहीं थी।
कौन सा इंजेक्शन लगा? यही सबसे बड़ा सवाल
मामले का सबसे अहम और संवेदनशील पहलू वह इंजेक्शन है, जो अस्पताल पहुंचने से पहले आश्रम में लगाया गया। प्रेक्षा अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण जैन के अनुसार, साध्वी के पिता ने बताया कि बुखार और सांस की शिकायत पर नर्सिंग स्टाफ द्वारा इंजेक्शन लगाया गया था, जिसके बाद वह निढाल हो गईं। हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इंजेक्शन कौन सा था, किसने लगाया और क्या वह चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित था। यही वजह है कि लोग इस बिंदु को मौत से सीधे जोड़कर देख रहे हैं।
चार घंटे बाद सोशल मीडिया पोस्ट, सुसाइड नोट की चर्चा
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर विवाद तब और गहरा गया, जब उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से मौत के करीब चार घंटे बाद एक लंबी पोस्ट सामने आई। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनकी मौत शाम करीब 5:30 बजे हो चुकी थी, जबकि सोशल मीडिया पोस्ट रात 9:28 बजे किया गया। इस पोस्ट को कथित “सुसाइड नोट” बताया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि मौत के बाद पोस्ट कैसे हुआ—क्या यह पहले से शेड्यूल था या किसी और ने पोस्ट किया? इस रहस्य ने जांच की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया है।


