गुरुग्राम में शुक्रवार देर रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने प्रशासन, स्थानीय लोगों और सुरक्षा व्यवस्था – तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। शहर के व्यस्ततम मार्गों में शामिल दौलताबाद फ्लाईओवर का एक बड़ा हिस्सा अज्ञात लोगों ने भारी मशीनों की मदद से तोड़ डाला, और हैरानी की बात यह रही कि नगर निगम, जीएमडीए और पीडब्ल्यूडी जैसे जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बिना अनुमति, बिना पहचान – रात में चली मशीनें
रात के सन्नाटे में अचानक सूरत नगर की ओर से भारी मशीनों की आवाज सुनाई दी। स्थानीय लोगों ने जब बाहर निकलकर देखा तो वहां पोकलेन और जेसीबी जैसी मशीनों से फ्लाईओवर का फुटपाथ और जर्सी बैरियर तोड़ा जा रहा था। करीब 50 से 60 मीटर तक का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। न कोई सरकारी कागज, न कोई अनुमति पत्र, न ही कोई पहचान – लेकिन मशीनें पूरी बेधड़क तरीके से काम करती रहीं।
प्रशासन अनजान, सिस्टम पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन विभागों के अधीन सड़कें और फ्लाईओवर आते हैं – नगर निगम, GMDA और PWD – किसी को भी इस कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। शनिवार शाम जब स्थानीय पार्षद को सूचना मिली, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। अलग-अलग विभागों से जानकारी ली गई, लेकिन सभी ने साफ इनकार किया कि किसी तरह की अनुमति जारी नहीं की गई थी। मौके पर एक भारी मशीन अब भी खड़ी मिली, जिससे शक और गहरा गया।
निजी बिल्डर कनेक्शन की आशंका
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह तोड़फोड़ किसी प्राइवेट बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए कराई गई है। उनका कहना है कि फ्लाईओवर का यह हिस्सा जानबूझकर हटाया गया ताकि किसी निजी परियोजना को रास्ता मिल सके। हालांकि फिलहाल इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परिस्थितियां इसे एक पूर्व नियोजित साजिश की ओर इशारा जरूर करती हैं।
अधिकारी बोले – अनुमति मांगी गई थी, दी नहीं गई
जीएमडीए की मोबिलिटी विंग के एक्सईएन आरसी देसवाल ने बताया कि एक स्थानीय व्यक्ति ने फ्लाईओवर के पास काम करने की अनुमति जरूर मांगी थी, लेकिन स्वीकृति नहीं दी गई। इसके बावजूद तोड़फोड़ होना सीधे तौर पर कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हजारों जानों से खिलवाड़
दौलताबाद फ्लाईओवर शहर का मुख्य यातायात मार्ग है, जहां से हर घंटे हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे संवेदनशील स्ट्रक्चर के साथ छेड़छाड़ न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान को खतरे में डालने जैसा है। बिना सुरक्षा मानकों, बिना ट्रैफिक डायवर्जन और बिना प्रशासनिक अनुमति के भारी मशीनरी का इस्तेमाल एक संभावित बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
अब तक न FIR, न पुलिस कार्रवाई
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब तक इस मामले में न कोई पुलिस शिकायत दर्ज हुई है, न ही कोई कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। घटना स्थल पर भीड़ जमा हो चुकी है, लोग नाराज हैं और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं – लेकिन सिस्टम अब भी धीमी गति से चलता दिख रहा है।
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