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January 14, 2026

मुंबई के पांच पुराने संकट: हर बीएमसी चुनाव के बाद भी आम मुंबईकर की परेशानियां जस की तस

The CSR Journal Magazine
मुंबई, देश की आर्थिक राजधानी, हमेशा से ही जीवन के दो पहलुओं का मिश्रण रही है—एक ओर ग्लैमर और उंची आर्थिक संभावनाएं, दूसरी ओर रोजमर्रा की चुनौतियां। जैसे-जैसे बीएमसी का चुनाव नज़दीक आता है, राजनीतिक वादे आम लोगों के लिए उम्मीद जगाते हैं। लेकिन मुंबई की कुछ समस्याएं इतनी गहरी हैं कि सालों का प्रशासनिक अनुभव भी उन्हें पूरी तरह हल नहीं कर पाया।

1. मॉनसून में बाढ़ का डर: हर साल का आम मुद्दा

मुंबई में वॉटरलॉगिंग की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। 2025 में बीएमसी ने 386 फ्लडिंग स्पॉट्स की पहचान की थी, जबकि हर साल औसतन 65 नए जोड़ते हैं। हिंदमाता, अंधेरी और मालाड जैसे इलाके हर वर्ष पानी में डूबते हैं। पुराने ड्रेनेज सिस्टम और नदियों में अवैध निर्माण तथा मैनग्रोव्स का नुकसान इस समस्या को और गंभीर बनाता है। करोड़ों की लागत के बावजूद भी फोकस स्थायी समाधान की बजाय सिर्फ अस्थायी उपायों तक सीमित रहता है।

2. ट्रैफिक और सड़कें: पॉटहोल और जाम की कहानी

मुंबई में ट्रैफिक जाम और गड्डेदार सड़कें सालों से आमदनी का हिस्सा बन चुकी हैं। मेट्रो, फ्लाईओवर और कोस्टल रोड जैसी परियोजनाएं प्रगति में हैं, लेकिन अधूरी डिगिंग और अधूरी सड़क मरम्मत हर मॉनसून में मुश्किलें बढ़ा देती है। अवैध पार्किंग और अतिक्रमण से ट्रैफिक मैनेजमेंट चुनौतीपूर्ण हो जाता है। शहर का बड़ा बजट होने के बावजूद, स्थायी समाधान अभी दूर नजर आता है।

3. कचरा प्रबंधन: गंदगी का अनजाने खतरा

मुंबई प्रतिदिन 8,000–9,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न करती है। डस्टबिन्स की ओवरफ्लोिंग, रिसाइक्लिंग की कमी और स्लम इलाकों में टॉयलेट्स की अपर्याप्त संख्या समस्या को और बढ़ा देती है। अनट्रीटेड कचरा मिठी नदी और समुद्र में जाता है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ता है। हर साल करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी कचरा प्रबंधन में स्थायी समाधान नहीं दिखाई देते।

4. पेयजल संकट: रोज़मर्रा की चुनौती

मुंबई में रोजाना 400–500 मिलियन लीटर पानी की कमी होती है। कई इलाकों में पानी की सप्लाई अनियमित और कम दबाव वाली है। पाइपलाइन डैमेज और बढ़ती आबादी के चलते यह समस्या और गंभीर हो रही है। चुनावों में मुफ्त पानी के वादे आम होते हैं, लेकिन पानी के स्रोत और स्थायी योजनाएं पीछे रह जाती हैं।

5. वायु प्रदूषण: सांस लेना कठिन

मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्सर अनहेल्दी स्तर पर पहुंच जाता है। कंस्ट्रक्शन डस्ट, ट्रैफिक, गार्बेज बर्निंग और इंडस्ट्रियल यूनिट्स इसके मुख्य कारण हैं। शहर में हरियाली कम होने और प्रदूषण नियंत्रण के अनुपालन में कमी होने से यह समस्या लंबी अवधि तक बनी रहती है।
चाहे बीएमसी का चुनाव कोई भी जीते, ये पांच समस्याएं—बाढ़, ट्रैफिक, कचरा, पानी और वायु प्रदूषण मुंबईकरों की रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रभाव डालती रहेंगी। प्रशासनिक बजट बड़ा होने के बावजूद स्थायी समाधान और दीर्घकालिक योजना की कमी इन मुद्दों को जटिल बनाए रखती है।
मुंबई की आर्थिक चमक और ग्लैमर के बीच ये “सनातन समस्याएं” शहर की असली कहानी बयां करती हैं—वो कहानी जो हर चुनाव के वादों के बावजूद जस की तस रहती है।
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