मुंबई में अवैध स्कूलों पर BMC की सख्ती, बच्चों की पढ़ाई बचाने की चुनौती

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मुंबई में अवैध स्कूलों पर BMC का शिकंजा, 1,240 विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों में भेजा; 77 के खिलाफ FIR, 164 अनधिकृत स्कूलों पर कार्रवाई

मुंबई में बिना जरूरी सरकारी मान्यता के संचालित स्कूलों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने कार्रवाई तेज कर दी है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान चिह्नित किए गए 164 अनधिकृत स्कूलों को बंद करने के नोटिस दिए गए थे। इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें मान्यता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब तक 1,240 विद्यार्थियों को महानगरपालिका द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, 77 स्कूलों के प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बीच विद्यार्थियों के भविष्य, अभिभावकों की पसंद, स्कूलों की मान्यता और शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

164 स्कूलों में करीब 5,000 विद्यार्थी थे नामांकित

BMC की ओर से चिह्नित 164 अनधिकृत स्कूलों में लगभग 5,000 विद्यार्थी पढ़ रहे थे। यह संख्या प्रभावित स्कूलों के प्रतिनिधियों के अनुमान पर आधारित बताई गई है। महानगरपालिका के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्थानांतरण की प्रक्रिया के तहत अब तक 690 विद्यार्थियों को BMC के स्कूलों में और 550 विद्यार्थियों को महानगरपालिका की सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया है। इस तरह कुल 1,240 विद्यार्थियों को दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी स्कूल की मान्यता नहीं होने की स्थिति में वहां पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक अभिलेख और आगे की कक्षाओं में प्रवेश प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—अनधिकृत स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई करना और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बीच में रुकने से बचाना।

77 स्कूलों के खिलाफ प्राथमिकी, प्रबंधन को बंद करने के निर्देश

महानगरपालिका ने 164 स्कूलों को बंद करने के नोटिस जारी किए थे। इसके बाद भी अनुमति के बिना संचालित हो रहे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई। इनमें से 77 स्कूलों के प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूलों को नए नोटिस जारी कर तत्काल संचालन बंद करने के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित स्कूल प्रबंधन दोषी साबित हो चुका है। मामलों में आगे की कार्रवाई जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।सितंबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, BMC ने इन 164 स्कूलों में से आठ को बंद किए जाने की बात कही थी। वहीं, अक्टूबर के अंत में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में नौ स्कूलों के बंद होने का उल्लेख किया गया। इससे स्पष्ट है कि नोटिस जारी करना, प्राथमिकी दर्ज करना और स्कूल को वास्तव में बंद कराना कार्रवाई के अलग-अलग चरण हैं।

70 स्कूल प्रबंधन पहुंचे बॉम्बे हाई कोर्ट

महानगरपालिका की कार्रवाई के खिलाफ कानूनी चुनौती भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज किए गए 77 स्कूलों में से 70 के प्रबंधन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। एक मामले में अदालत ने याचिका पर सुनवाई होने तक संबंधित स्कूल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम निर्देश दिया था। इसके बाद BMC ने अदालत के आदेश और अन्य लंबित याचिकाओं के संबंध में अपने विधि विभाग से मार्गदर्शन मांगा। इसलिए सभी स्कूलों के मामलों में एक जैसी स्थिति मानना उचित नहीं होगा। किसी स्कूल को अदालत से मिली अंतरिम राहत का दायरा संबंधित आदेश पर निर्भर करेगा।

गोवंडी के शिवाजी नगर में बनाया गया प्रवेश केंद्र

प्रभावित विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए BMC ने एम-ईस्ट विभाग के अंतर्गत गोवंडी के शिवाजी नगर स्थित नए महानगरपालिका स्कूल भवन में प्रवेश केंद्र बनाया है। इसका उद्देश्य अभिभावकों को प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने और बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त स्कूल तलाशने में सहायता देना है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, इस केंद्र पर अभिभावकों की प्रतिक्रिया अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है। कुछ परिवारों के लिए स्कूल बदलने का फैसला आसान नहीं है। वे अपने बच्चों की भाषा, पढ़ाई के माध्यम, घर से स्कूल की दूरी और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हैं। एक अभिभावक ने बताया कि वह अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना चाहती हैं, लेकिन घर के नजदीक उपलब्ध महानगरपालिका स्कूल में उन्हें पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई की सुविधा नहीं मिलती। उन्होंने यह भी बताया कि जिस स्कूल में उनके बच्चे पढ़ रहे थे, उसके प्रबंधन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया था कि जरूरी अनुमति जल्द मिल जाएगी। यह स्थिति बताती है कि केवल प्रवेश की व्यवस्था कर देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को ऐसे स्कूल में स्थानांतरित करना भी जरूरी है जहां उनकी कक्षा, भाषा और पाठ्यक्रम के अनुरूप पढ़ाई जारी रह सके।

45 स्कूलों को मान्यता देने का प्रस्ताव भी लंबित

इस मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू उन 45 प्राथमिक स्कूलों का है, जिनके प्राथमिक विभाग को मान्यता दिलाने के लिए BMC ने महाराष्ट्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजे हैं। इन स्कूलों में माध्यमिक कक्षाएं संचालित होने की जानकारी भी सामने आई है, जबकि प्राथमिक विभाग की मान्यता का मामला लंबित बताया गया है। इन प्रस्तावों पर सरकार का फैसला अभी प्रतीक्षित था। जब तक संबंधित अनुमति नहीं मिलती, तब तक प्रस्ताव भेजे जाने को मान्यता मिल जाने के बराबर नहीं माना जा सकता। इससे यह सवाल भी उठता है कि जिन संस्थानों में लंबे समय से बच्चे पढ़ रहे हैं, उनकी मान्यता की स्थिति की समय रहते जांच क्यों नहीं की गई। यदि स्कूल आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करते, तो सुधार के लिए समयबद्ध प्रक्रिया और अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। वहीं, नियमों का पालन किए बिना स्कूल चलाने की अनुमति देना भी बच्चों के हित में नहीं है।

स्कूलों की इमारतों की संरचनात्मक जांच के निर्देश

BMC ने उन इमारतों और चॉलों की संरचनात्मक जांच कराने के लिए भी संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, जहां अनधिकृत स्कूल चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन भवनों में स्कूल संचालन के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। हालांकि, सभी संबंधित इमारतों की जांच पूरी हो चुकी है या कितने भवनों में कोई कमी पाई गई है, इसका विस्तृत और समेकित ब्योरा उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि सभी अनधिकृत स्कूलों की इमारतें असुरक्षित हैं। लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भवनों की जांच और कमियों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है।

शिक्षा का अधिकार कानून क्या कहता है?

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत स्कूलों को निर्धारित मान्यता संबंधी शर्तें पूरी करनी होती हैं। कानून की धारा 18 में मान्यता के बिना स्कूल चलाने पर रोक का प्रावधान है। धारा 18(5) के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन 10,000 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है। इस प्रावधान का उद्देश्य केवल स्कूल बंद कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि बच्चों को निर्धारित शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। मान्यता प्राप्त स्कूल में प्रवेश मिलने से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन स्थानांतरण के दौरान उनके पिछले शैक्षणिक अभिलेख, कक्षा और पाठ्यक्रम में निरंतरता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती

इस कार्रवाई का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्होंने अपने बच्चों को इन स्कूलों में प्रवेश दिलाया था। कई अभिभावक फीस, घर से दूरी, पढ़ाई के माध्यम और परिचित शिक्षकों को ध्यान में रखकर स्कूल चुनते हैं। जब अचानक स्कूल बंद करने का नोटिस मिलता है, तो उन्हें नए स्कूल में प्रवेश, दस्तावेजों के हस्तांतरण और पढ़ाई के क्रम को लेकर चिंता होती है। ऐसे में अभिभावकों को स्कूल की सरकारी मान्यता, मान्यता प्राप्त कक्षाओं, संबंधित शिक्षा बोर्ड और अन्य जरूरी अनुमतियों की जानकारी प्रवेश से पहले जांचनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन के मौखिक आश्वासन पर ही निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है। BMC और शिक्षा विभाग के लिए भी जरूरी है कि प्रभावित विद्यार्थियों की पहचान, प्रवेश और स्थानांतरण का स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध कराया जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई बच्चा केवल स्कूल बंद होने के कारण शिक्षा से वंचित न रह जाए।

शिक्षा व्यवस्था में नियम पालन जरूरी

मुंबई में 164 अनधिकृत स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई ने शिक्षा व्यवस्था में मान्यता और निगरानी की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। अब तक 1,240 विद्यार्थियों का स्थानांतरण, 77 स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी और 70 प्रबंधन की न्यायालय में याचिकाएं इस मामले के प्रमुख घटनाक्रम हैं। वहीं, 45 प्राथमिक स्कूलों के मान्यता प्रस्तावों पर सरकारी निर्णय और शेष विद्यार्थियों के प्रवेश की स्थिति भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। आने वाले समय में कार्रवाई की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने नोटिस जारी हुए या कितनी प्राथमिकी दर्ज की गईं। असली कसौटी यह होगी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो, स्कूल भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और प्रभावित बच्चों की पढ़ाई बिना अनावश्यक बाधा के जारी रहे।

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