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January 23, 2026

MP का चमत्कारी सरस्वती मंदिर, जहां मिठाई नहीं पेन-कॉपी चढ़ाते हैं भक्त, बसंत पंचमी पर उमड़ता है छात्रों का सैलाब

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एक अनोखा सरस्वती मंदिर इन दिनों खासा चर्चा में है. कारण है इसकी असाधारण परंपरा, जहां मां सरस्वती को लड्डू-पेड़ा नहीं, बल्कि पेन, कॉपी और किताबें अर्पित की जाती हैं. बसंत पंचमी के मौके पर यह मंदिर विद्यार्थियों के लिए आस्था और उम्मीद का बड़ा केंद्र बन जाता है, जहां हजारों छात्र परीक्षा में सफलता की कामना लेकर पहुंचते हैं.

प्रसाद में ज्ञान की सामग्री, यही है मंदिर की पहचान

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका चढ़ावा है. यहां श्रद्धालु मिठाइयों के बजाय लेखन और अध्ययन से जुड़ी सामग्री चढ़ाते हैं. मान्यता है कि जो छात्र श्रद्धा और विश्वास के साथ मां सरस्वती के चरणों में पेन या कॉपी अर्पित करता है, उसे पढ़ाई में एकाग्रता और परीक्षा में सफलता मिलती है. यही वजह है कि परीक्षा से पहले यह मंदिर छात्रों से खचाखच भरा रहता है.

बुंदेलखंड का एकमात्र उत्तरमुखी सरस्वती मंदिर

सागर शहर के इतवारा बाजार क्षेत्र में स्थित यह मंदिर बुंदेलखंड का एकमात्र उत्तरमुखी सरस्वती मंदिर माना जाता है. यहां मां सरस्वती की आदमकद संगमरमर की प्रतिमा उत्तर दिशा की ओर स्थापित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा को ज्ञान की दिशा कहा जाता है और मां सरस्वती को भी उत्तर दिशा की देवी माना जाता है. इसी कारण यह मंदिर विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है.

1962 से 1971 तक का प्रेरक निर्माण इतिहास

मंदिर के पुजारी यशोवर्धन चौबे बताते हैं कि इस मंदिर के निर्माण की शुरुआत वर्ष 1962 में उनके पिता प्रभाकर चौबे ने की थी. शुरुआत में यहां केवल एक बरगद का पौधा लगाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण हुआ. वर्ष 1971 में मंदिर भव्य रूप में बनकर तैयार हुआ और उसी वर्ष जयपुर से मंगवाई गई मां सरस्वती की प्रतिमा की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई.

बसंत पंचमी पर विशेष आयोजन और संस्कार

हर वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर इस मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. सुबह से देर रात तक पूजा-अर्चना, हवन और संस्कार संपन्न कराए जाते हैं. इस दिन बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए अक्षर आरंभ संस्कार कराया जाता है, जिसमें बच्चे की जीभ पर अनार की लकड़ी और शहद से ‘ॐ’ की आकृति बनाई जाती है.

14 संस्कार और अनूठी मनोकामना परंपराएं

इस मंदिर में कुल 14 संस्कार कराए जाते हैं, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाते हैं. यहां कुछ विशेष मनोकामना परंपराएं भी प्रचलित हैं. मान्यता है कि 108 बादाम की माला चढ़ाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, जबकि विद्यार्थी ज्ञानवृद्धि के लिए 108 मखानों की माला अर्पित करते हैं.

आस्था, संस्कृति और शिक्षा का प्रतीक

यह अनोखा सरस्वती मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, शिक्षा और संस्कारों का जीवंत केंद्र है. विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मां सरस्वती की कृपा से उनकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं. यही कारण है कि यह मंदिर सागर ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड में एक विशिष्ट पहचान बना चुका है.
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