आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि समाज की सुरक्षा केवल उसकी अपनी तैयारी और एकजुटता से संभव है। भागवत ने बांग्लादेश में हिंदुओं को एकजुट होकर अपनी भलाई और सुरक्षा के लिए प्रयास करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बांग्लादेश में एक सौ पच्चीस करोड़ हिंदू हैं और यदि वे एकजुट हो जाएं, तो राजनीति का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा के लिए कर सकते हैं।
एकता का मंत्र: सजगता और सक्रियता
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज का मजबूत खड़ा होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मोहन भागवत ने कहा कि यदि हिंदू एक साथ मिलकर संघर्ष करेंगे, तो उनका एक होना बहुत आवश्यक है। यदि हिंदू अपने संगठनों में सजगता और सक्रियता लाते हैं, तो वे अपनी स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। इसके लिए सभी को अपने स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।
लड़ाई का संकल्प: भागना नहीं, रहना है
आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश में हिंदुओं को अपनी भूमि पर रहकर अपनी सुरक्षा के लिए लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें वहाँ से नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने अधिकारों के लिए दृढ़ता से खड़ा होना चाहिए। जब वे एकजुट होकर लड़ेंगे, तभी उनकी स्थिति में सुधार संभव है। भागवत का कहना है कि जितनी जल्दी वे एकजुट होंगे, उनकी स्थिति उतनी बेहतर हो जाएगी।
जागरूकता का महत्व: व्यक्तिगत जिम्मेदारी
मोहन भागवत ने यह भी बताया कि समाज में सजगता और सुरक्षा की तैयारी न केवल नेतृत्व बल्कि हर एक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी होता है, वह सभी पर असर डालता है, इसलिए हर किसी को सजग रहकर अपनी भूमिका निभानी होगी। इस प्रकार, एकजुटता से ही सामाजिक सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
भारतीय समाज का भी दायित्व
आरएसएस प्रमुख ने भारतीय समाज को भी याद दिलाया कि उन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति के बारे में चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में हिंदुओं को एकजुट होकर उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने विश्वास दिलाया कि यदि हिंदू संगठित हों, तो वे अपनी सुरक्षा की गारंटी ले सकते हैं।
आगे का रास्ता: भाईचारे और सहयोग की आवश्यकता
आरएसएस प्रमुख ने सभी हिंदुओं से अपील की कि वे परस्पर सहयोग करें और एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। उन्होंने कहा कि समाज के सभी सदस्य अगर मिलकर काम करेंगे, तो उनकी आवाज़ मजबूत होगी और वे अपनी स्थिति को सुधार सकेंगे।