14 लाख सैन्यकर्मियों के वाहनों को टोल में छूट, Gadkari और Rajnath की बैठक शुरू

The CSR Journal Magazine
\नई दिल्ली: केंद्र सरकार 14 लाख सक्रिय रक्षा कर्मियों के निजी वाहनों को टोल से छूट देने की योजना बना रही है। यह कदम ‘बैरियर-लेस’ हाईवे टोल सिस्टम से जुड़ी एक खास समस्या को सुलझाने के लिए उठाया जा रहा है। मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम वाले हाईवे पर, निजी वाहनों का इस्तेमाल करने वाले रक्षा कर्मियों को ई-चालान भेजे जा रहे हैं।

सड़क परिवहन और रक्षा मंत्रालय की बातचीत

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत शुरू की है, ताकि एक ऐसा तरीका निकाला जा सके जिससे इन निजी वाहनों को बिना ट्रैफिक में रुकावट डाले टोल से छूट मिल सके। एक प्रस्ताव यह है कि ऐसे वाहनों पर फास्टैग (FASTag) लगाया जाए और इसके सालाना पास का खर्च रक्षा मंत्रालय द्वारा वापस किया जाए। हालांकि, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि पास का खर्च कौन उठाएगा, इस पर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।

विभिन्न विकल्पों पर विचार

एक और विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें एक अलग तरह का फास्टैग इस्तेमाल होगा; यह फास्टैग वाहन की आवाजाही को तो रिकॉर्ड करेगा, लेकिन उससे टोल शुल्क नहीं काटा जाएगा। MoRTH ने पहले संकेत दिया था कि इस साल के अंत तक लगभग सभी टोल प्लाजा इस सिस्टम के तहत आ सकते हैं, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया काफी धीमी रही है।
अभी क्या है व्यवस्था मौजूदा व्यवस्था के तहत, सशस्त्र बलों के कर्मियों के निजी वाहन टोल प्लाजा पर अपना पहचान पत्र दिखाकर टोल भुगतान से छूट का दावा कर सकते हैं। MLFF सिस्टम भौतिक बाधाओं और मैन्युअल सत्यापन की जरूरत को खत्म कर देता है। इसमें ऊपर लगे गैंट्री का इस्तेमाल होता है, जिनमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर लगे होते हैं।

सैन्यकर्मियों की पहचान की प्रक्रिया

डिफेंस नंबर प्लेट से भी सैन्यकर्मियों के वाहनों की पहचान संभव है। मई 2026 में आई रिपोर्टों के अनुसार, MoRTH टोल-मुक्त वाहनों के लिए अलग से FASTag लाने पर विचार कर रहा था, ताकि बिना किसी शुल्क की कटौती या जुर्माने के, इन वाहनों की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सके।

सरकार पर वित्तीय बोझ

भारत के सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में लगभग 14 लाख सक्रिय कर्मी हैं। मौजूदा फास्टैग वार्षिक पास की कीमत 2026-27 के लिए 3,075 रुपये है और इसे बड़ी संख्या में वाहनों के लिए विस्तारित करने पर सालाना कई सौ करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। उदाहरण के लिए, 10 लाख वाहनों के लिए यह खर्च 307.5 करोड़ रुपये होगा।
अंतिम खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने वाहन छूट के पात्र हैं। सिस्टम की विश्वसनीयता के लिए वाहनों की सटीक पहचान, समय-समय पर सत्यापन और रियल-टाइम डेटाबेस सिंक्रोनाइज़ेशन बहुत महत्वपूर्ण हैं। इससे डिजिटल रिकॉर्ड भी बने रहेंगे और वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

MLFF के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की उम्मीद

उम्मीद है कि MLFF के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार से पहले इस प्रस्तावित ढांचे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जिससे सशस्त्र बलों के कर्मियों को मिलने वाली छूट और स्वचालित टोलिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली के बीच एक उचित संतुलन बना रहे।

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