ममता की राह में रोड़ा बनेंगे ओवैसी और हुमायूं, क्या बंगाल में बिखरेगा मुस्लिम वोट बैंक?

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुस्लिम समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहाँ की कुल संदर्भित जनसंख्या में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी है। यह आंकड़ा लगभग 130 विधानसभा सीटों पर जीत-हार का निर्णय करता है। टीएमसी पर इनकी निर्भरता के बावजूद अब असंतोष पनपने लगा है। नए दल जैसे ISF और AIMIM ने भी चुनावी मैदान में कदम रखा है, जो मुस्लिम वोटों के बंटवारे की आशंका पैदा कर रहे हैं।

बंगाल का मुस्लिम वोट बैंक

राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 130 ऐसी हैं, जहाँ मुस्लिम वोटरों की तादाद जीत-हार का निर्धारण करती है। मुर्शिदाबाद, मालदा, और उत्तर दिनाजपुर जिलों में मुसलमानों की जनसंख्या इतनी अधिक है कि उनके समर्थन के बिना चुनाव जीतना कठिन है। यह स्थिति राजनीतिक दलों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

नाराजगी का बढ़ता आलम

टीएमसी का समर्थन पाने के बावजूद अब मुसलमानों में नाराजगी बढ़ रही है। कई लोगों का मानना है कि राजनीतिक दल उनकी केवल वोट बैंक के रूप में कीमत लगाते हैं और वास्तविक विकास पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में कुछ मुस्लिम मतदाता अब ओवैसी और अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं।

ISF और वाम गठबंधन का उदय

नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) मुस्लिम वोट जमा करने के प्रयास में लगा हुआ है। ISF ने वाम गठबंधन और कांग्रेस के साथ मिलकर टीएमसी के दबदबे को चुनौती देने का मन बना लिया है। लेकिन, इस गठबंधन के प्रभाव के बारे में अनिश्चितता भी बनी हुई है।

हुमायूं कबीर का नया जलवा

टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के साथ हाथ मिलाया है। वे अपनी जेनेरिक पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) और AIMIM के साथ मिलकर 182 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। हुमायूं कबीर का नाम इस स्थिति में खास चर्चा में है, विशेष रूप से बाबरी मस्जिद पर उनकी पहल को लेकर।

राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं

हुमायूं कबीर और ओवैसी के गठबंधन को कुछ नेता आलोचना का शिकार बना रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मुस्लिम वोट बंट सकते हैं, जो धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को कमजोर करता है और बीजेपी को फायदा पहुंचाता है। लेकिन, सियासी गलियारों में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या AIMIM-AJUP गठबंधन का टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ेगा।

टीडीपी और कांग्रेस की चिंताएं

टीएमसी और कांग्रेस को यह नया गठबंधन पसंद नहीं आ रहा है। वे इसे बीजेपी की B टीम मान रहे हैं। हुमायूं कबीर का TMC से बाहर होना और फिर AIMIM में शामिल होना चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके बाबरी मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव ने स्थिति को और भी रोचक बना दिया है।

बंगाल में चुनावों का रोमांच

अब, ओवैसी की पार्टी के साथ हुमायूं कबीर का चुनावी सफर शुरू हो चुका है। राज्य में मुस्लिम आबादी की संख्या को ध्यान में रखते हुए, सभी पार्टियों की नजर इस वोट पर है। राजनीतिक हालात में नए टर्न और ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं, जो आने

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