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February 21, 2026

राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला: अमेरिकी टैरिफ डील में किया विश्वासघात

The CSR Journal Magazine
अमेरिकी टैरिफ डील को लेकर मोदी सरकार पर विपक्ष ने एक बार फिर से हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री का विश्वासघात अब सामने आ गया है और उन्होंने चेतावनी दी कि मोदी इस समझौते में एक बार फिर आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

खड़गे का बयान: ट्रैप डील का शिकार भारत

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना मोदी सरकार इतनी जल्दी में क्यों थी? उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक ‘ट्रैप डील’ है जो भारत से भारी रियायतें छीन रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने 2 फरवरी को भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया था।

ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लागू किए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह निर्णय दिया कि संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद को है, न कि राष्ट्रपति को।

खड़गे का मोदी सरकार को सख्त संदेश

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मोदी जी को खुलकर देशवासियों के सामने सच बताना चाहिए कि किसने उन पर भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का दबाव डाला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसे लेकर एप्सटीन फाइल्स जैसी कोई वजह थी। क्या भारत सरकार इस निष्क्रियता से जागेगी और किसानों, मजदूरों, छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा करेगी?

रमेश ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वास्तव में एक परीक्षा है, जिसे मोदी की हताशा और आत्मसमर्पण के चलते भारत पर थोपा जा रहा है।

अमेरिकी टैरिफ क्या है?

अमेरिकी टैरिफ का अर्थ अमेरिका द्वारा दूसरे देशों से आयात होने वाले सामान पर लगाया गया आयात कर (Import Duty) है। डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल में अमेरिका ने “ग्लोबल टैरिफ पॉलिसी” लागू की थी, जिसके तहत कई देशों पर ऊंचे टैरिफ लगाए गए, ताकि विदेशी उत्पाद महंगे हों और घरेलू अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा मिले।
इसी नीति के तहत भारत समेत कई देशों पर भी टैरिफ लगाए गए और बाद में कुछ मामलों में बातचीत के जरिए इन्हें घटाया गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में इसी टैरिफ नीति से जुड़ी शर्तें शामिल हैं। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद यह मुद्दा और विवादास्पद हो गया, जिससे इस डील की वैधता और समय-सीमा पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

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